कोरोना वायरस की महामारी के बीच ही उन परिवारों की चिंताएं और बढ़ गई हैं, जिनके बच्चे यूरोपीय देशों में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बन्ना देवी के आईटीआई रोड निवासी पारस गौड़ जर्मनी के म्यूनिख शहर में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और इस समय वहीं पर हैं।
अमर उजाला से व्हाट्सएप के माध्यम से हुई बातचीत के दौरान पार ने बताया कि यहां पर आधिकारिक रूप से 20 मार्च को सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया है, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए 6 मार्च को ही घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। इस वक्त अगर कोई बेवजह सड़क पर निकल रहा है तो उस पर 2200 सौ यूरो का जुर्माना लगाया जा रहा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 2 लाख होती है। पारस के मुताबिक जर्मनी में अब तक 40,000 से अधिक कोरोना के मामले प्रकाश में आ चुके हैं ।
इनमें से 3800 केस सही हो चुके हैं, जबकि 250 की मौत हो चुकी है । अभी तक किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय छात्र के कोरोना से संक्रमित होने का कोई समाचार नहीं है। पारस गौड़ ने अलीगढ़ के ही केंद्रीय विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण की थी और मंगलायतन विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था। पारस अक्तूबर 2018 से जर्मनी में हैं और वहां की म्यूनिख टेक्निकल यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पारस के मुताबिक भारत के विषय में वे लगातार खबरें देख और सुन रहे हैं। भारत में अभी स्थिति काफी नियंत्रण में है, क्योंकि यूरोपीय देशों में हालात काफी गंभीर हो चलें है।
जर्मन सरकार के निर्देश 2 लोग एक साथ दिखाई न दें पारस गौड़ कहते हैं कि जर्मनी में लोगों को जरूरी वस्तुएं खरीदने के लिए 2 घंटे का समय सुबह के समय दिया जा रहा है। इस दौरान भी 2 लोग एक साथ दिखाई नहीं देने के निर्देश हैं। इसलिए लोग सोशल डिस्टेंसिंग का बहुत ध्यान रख रहे हैं।