सेंटर प्वाइट पर तेज धूप में छाता लगाकर जाती युवतियां।
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जिले में गर्मी का कहर जारी है। सुबह से निकली चुभती धूप ने लोगों को खूब सताया। गर्मी में कोई प्यास से परेशान दिखा तो किसी को लू के थपेड़ों ने परेशान किया। धूल भरी आंधी ने आग में घी डालने का काम किया। दोपहर 12 बजे चिलचिलाती धूप ने लोगों को तंग किया। धूप व धूल से बचने के लिए लोगों ने मास्क, अंगोछा आदि का सहारा लिया।
इस बार अप्रैल में लू के थपेड़े शुरू हो गए हैं। अमूमन मई-जून में चलने वाली लू इस बार अप्रैल में ही शुरू हो गई है। एएमयू भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रो. सलेहा जमाल बताती हैं कि ज्यादा गर्मी होना ग्लोबल वार्मिंग का कारण है। हर साल गर्मी बढ़ रही है, क्योंकि प्रदूषण अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचता जा रहा है। दो साल कोरोना काल में गर्मी कम रही थी। इसका कारण था कम प्रदूषण।
लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियां बंद थीं। सड़क पर वाहन भी न के बराबर दौड़ रहे थे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद दोबारा प्रदूषण हावी होने लगा है। शहरीकरण भी एक वजह है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
रोडवेज बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर भी लोग गर्मी से परेशान दिखे। डॉक्टरों की सलाह है कि गर्मी में पानी की कमी से बचें। घर से बोतल में नमक चीनी का घोल बनाकर निकले। तरल पदार्थों का उपयोग करें।