फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras Murder: कत्ल की असली वजह छिपा रही पुलिस...खुलासे से परिजन असंतुष्ट, बोले- तांत्रिक क्रिया की कहानी गलत

Sat, 28 Sep 2024 01:39 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस के डीएल पब्लिक स्कूल में छात्र की हत्या के खुलासे से परिजन असंतुष्ट हैं। परिजनों ने सीबीआई जांच कराने की मांग की है। कृतार्थ के परिजनों ने कहा है कि पुलिस हत्या की असली वजह छिपा रही है। स्कूल पर बुलडोजर चलना चाहिए।
विज्ञापन
Hathras Murder - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाथरस के डीएल पब्लिक स्कूल में हुई छात्र कृतार्थ की हत्या के खुलासे और पुलिस की कहानी से परिजन संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस कुछ छिपा रही है। उन्होंने स्कूल पर बुलडोजर चलाने और घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
विज्ञापन


कृतार्थ की मौत के बाद से परिवार और गांव में गम का महौल है। कृतार्थ के घर पर बरामदे में महिला और पुरुषों की भीड़ लगी है। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, मां गुमसुम बैठी हुई है। महिलाएं उसे ढांढस बंधा रही है। 

पुलिस के खुलासे का जिक्र होते ही ग्रामीण और परिजनों का गुस्सा बाहर आ जाता है। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने जो तांत्रिक क्रिया वाली कहानी को बताकर खुलासा किया है, वह गलत है। 
विज्ञापन


पुलिस कुछ छिपा रही है। कृतार्थ के दादा मान सिंह का कहना है कि एक तो खुलासे में पुलिस ने पांच दिन लगा लिए। इसके बाद सही तरीके से खुलासा नहीं किया है। घटना की वजह पुलिस नहीं बता पा रही है। 
 

इस मामले की सीबीआई जांच होने चाहिए, जिससे कि मामले की हकीकत सामने आ सके। परिजनों का कहना है कि अगर इस विद्यालय प्रबंधक के सत्ताधारी मंत्री से संबंध नहीं होते तो अब तक पुलिस बुलडोजर चला चुकी होती, लेकिन अब पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

 

अभी तक हमें यह नहीं पता है कि आखिर हमारे बच्चे पर ही क्यों तंत्र क्रिया की गई। पुलिस इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रही है। खुलासे में जो बात कही है, वह नितांत गलत है। इस मामले में जांच सीबीआई से होनी चाहिए। घनश्याम सिंह, मृतक का ताऊ।
 

पैसा तो बेकार गया, अब बच्चों का भविष्य खराब होने की भी चिंता
हाथरस के गांव रसगवां के डीएल पब्लिक स्कूल में आसपास के 20 गांवों के करीब 700 बच्चे पढ़ते थे। गांवों के अलावा जिला अलीगढ़, सिकंदराराऊ, मथुरा एवं राजस्थान के बच्चे भी पढ़ते थे। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। इनमें से कुछ अभिभावकों ने स्कूल को पूरे साल की फीस का अग्रिम भुगतान कर दिया था।

अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने इस स्कूल की किताब और यूनिफॉर्म दिलवा दी है और पूरे साल की फीस एकमुश्त जमा कर दी। अब किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाना होगा तो वहां भी पूरे साल की फीस जमा करनी होगी। रसगवां निवासी बलवीर का कहना है कि उनके नाती एवं नातिन दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे।
 

अब देखते हैं कि कब तक यह स्कूल खुलता है। यदि स्कूल को खुलने में समय लगता है तो किसी अन्य स्कूल में उनका दाखिला कराएंगे। इसी गांव के सोनू का कहना है कि उनका बच्चा शौर्य कक्षा पांच में पढ़ता था। वह तीन साल से इस स्कूल का छात्र था। अब उसे सादाबाद भेजने का विचार बना रहा हूं।
विज्ञापन

आर्थिक हानि तो हो गई है। इसी गांव निवासी अंकित का कहना है कि उन्होंने तो इसी साल इस स्कूल में बच्चे का दाखिला कराया था। अब यह घटना घटित हो गई। अब किसी दूसरे स्कूल में उसको प्रवेश दिलाना पड़ेगा।। इस स्कूल में दाखिला कराने पर पैसा खर्च हुआ, अब दूसरे स्कूल में भी पैसा देना पड़ेगा।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें