यूपी के हाथरस में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले को लेकर पूरे देश में आक्रोश है। इसी बीच गांव में कई जनप्रतिनिधि बिटिया के गांव पहुंचने की कोशिश कर रहें हैं। जिसे लेकर पुलिस प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अब पुलिस प्रशासन के सामने एक और समस्या सामने आ गई है। गांव में तैनात तीन पुलिसकर्मियों में कोरोना के लक्ष्ण नजर आए हैं। जिला प्रशासन ने पुलिस कर्मियों को परीक्षण करने के लिए भेजा।
अगर पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो गांव को कंटेनमेंट जोन घोषित किया जा सकता है। इस डीएम ने कहा है कि हमने पुलिसकर्मियों को कोरोना जांच कराने के लिए कहा है। यदि उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो गांव को कंटेनमेंट जोन घोषित किया जा सकता है।
एसआईटी जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर हाथरस सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यमा दुबे और वकील विकास ठाकरे व रुद्र प्रताप यादव द्वारा संयुक्त रूप से दायर इस जनहित याचिका में यह दावा किया गया है कि इस मामले में पीड़ित पक्ष के साथ पुलिस को जो दायित्व का निर्वाह करना था, वह उसने नहीं किया।
यह भी दावा किया गया है कि पुलिस द्वारा इस मामले में आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की जांच सीबीआई या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली एसआईटी से कराने की गुहार की है।
वहीं तहसीन पूनावाला ने चीफ जस्टिस एस ए बोबडे को पत्र लिखकर इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव और हाथरस के जिला अधिकारी को तलब करने की मांग की है।
बता दें कि हाथरस कांड को लेकर पूरे देश में उबाल है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाथरस दुष्कर्म कांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फोन पर चर्चा की और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी ने भी कहा कि हाथरस में बालिका के साथ घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दोषी कतई नहीं बचेंगे। प्रकरण की जांच हेतु विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह दल आगामी सात दिनों में अपनी रिपोर्ट देगा। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकरण का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा।