अलीगढ़ शहर में श्रीराम के भक्त हनुमान के कई मंदिर हैं, जिनमें हनुमान जी की विभिन्न रूपों में पूजा की जाती है। ये मंदिर सिर्फ पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा की अनोखी पहचान व सामाजिक एकता के केंद्र भी हैं। यह मंदिर शहर की सांस्कृतिक पहचान व श्रद्धा की मजबूत धरोहर भी बने हुए हैं। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।
प्राचीन सिद्धपीठ श्री गिलहराज जी मंदिर
शहर में द्वारिकापुरी अचलताल क्षेत्र में अचल सरोवर के किनारे स्थित प्रसिद्ध श्री गिलहराज हनुमान मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान हनुमान गिलहरी के रूप में विराजमान हैं और उन्हें पूजा जाता है। मंदिर महंत योगी काैशलनाथ के अनुसार, यह मंदिर रामायण की उस कथा से जुड़ा है, जिसमें गिलहरी ने रामसेतु निर्माण में योगदान दिया था। जब वानर सेना रामसेतु का निर्माण कर रही थी, तब भगवान राम ने हनुमान जी को विश्राम करने का आदेश दिया। परंतु हनुमान जी ने सेवा जारी रखने के लिए सूक्ष्म रूप यानी गिलहरी का रूप धारण कर लिया और रेत के कण डालकर सेतु निर्माण में मदद करने लगे। जब प्रभु श्री राम ने गिलहरी रूपी हनुमान को पहचान लिया, तो उन्होंने प्रेम से उनकी पीठ पर हाथ फेरा। मान्यता है कि गिलहरी की पीठ पर दिखने वाली तीन धारियां भगवान राम की उंगलियों के निशान हैं।
मूंछों वाले हनुमानजी का मंदिर
शहर के महावीरगंज स्थित इस मंदिर में भगवान मूंछों वाले हनुमान जी के रूप में विराजमान है, जो वीरता और पराक्रम का प्रतीक मानी जाती है। मंदिर अपनी विशिष्ट प्रतिमा के कारण श्रद्धालुओं के बीच खासा आकर्षण का केंद्र है। यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है।
तालानगरी स्थित बालाजी मंदिर
शहर के तालानगरी स्थित बालाजी मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है। बड़ी संख्या में लोग बालाजी मंदिर में अपनी आस्था व मुरादें लेकर पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि अपने दुख-दर्द लेकर आने वाले श्रद्धालुओं का बालाजी के रूप में विराजमान हनुमान जी उनके कष्टों का हरण करते हैं।