उसमें बैंक से मिलने वाली ऑटो फारवर्ड की सुविधा शामिल कराई जाती है, जिसके जरिये एक साथ 50-100 खातों में रकम ट्रांसफर हो सके। इसके बाद जब खाता धारक उनके झांसे में आ जाता है तो उसे किसी अपने एजेंट के पास बुलाकर बैठाया जाता है। वहां बैठाकर ठगी की रकम उसके खाते में ट्रांसफर कराई जाती है या फिर काला धन भी उस खाते में ट्रांसफर कराया जाता है। रकम आते ही उसे छोटी-छोटी किश्तों में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। छोटी-छोटी किश्तों में यह रकम सिर्फ एक ओटीपी के सहारे ट्रांसफर हो जाती है।
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस तरह के ऑफर किसी को भी आते हैं और लालचवश लोग फंस जाते हैं। ऐसे लोगों से अपील है कि वह लालची ऑफर में फंसकर किसी को अपने खाते का प्रयोग न करने दें और न किसी के कहने पर खाता खुलवाएं, अन्यथा वह भी ठगी का हिस्सा बन सकते हैं।-सुरेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर साइबर थाना