हज सब्सिडी खत्म किए जाने से बुद्िधजीवी मुस्लिमों में नाराजगी है। ये सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म होनी चाहिए, जो कोर्ट के फैसले पर हर साल 10 फीसदी कटौती हो रही थी। सरकार के रवैये को गलत बताया गया है। वहीं, सरकार मुस्लिमों से दुश्मनी निभा रही है। हज सब्सिडी खत्म होने पर बुिद्धजीवी मुस्लिमों से अमर उजाला ने बातचीत की। पढ़िये उनकी राय..।
हाजियों को पहले भी लूटा जा रहा था और आगे भी लूटा जाएगा। 25-28 हजार के टिकट को 65 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। सरकार को खुला टेंडर देना चाहिए। एयर इंडिया से हाजियों को जाने के लिए बाध्य न करके, उन्हें प्राइवेट कंपनियों के हवाई जहाज से अरब आने-जाने की अनुमति देनी चाहिए। सरकारें पहले इंडिया इंडिया को पाल रही थीं। अब 49 फीसदी एयर इंडिया का शेयर बेच कर सरकार खुश है। हज सब्सिडी खत्म कर दी गई, लेकिन कैलाश मानसरोवर के नाम पर राज्य सरकारें सब्सिडी दे रही हैं।
-मुफ्ती जाहिद खान, सुन्नी थियोलॉजी विभाग एमएयू
हज सब्सिडी खत्म होना सही नहीं है। यह सब्सिडी उन लोगों के लिए शुरू की गई थी, जो गरीब थे। बहरहाल, कोर्ट ने सब्सिडी को हर साल 10 फीसदी कटौती का फरमान सुनाया था, जो कटौती हो भी रही थी, लेकिन सरकार ने अचानक सब्सिडी बंद करके गलत किया है। कोर्ट का फैसला ठीक था, लेकिन सरकार का यह रवैया गलता है।
-मोहम्मद खालिद हमीद, शहर मुफ्ती
केंद्र सरकार मुस्लिमों के साथ दुश्मनी निभा रही है। सबका साथ सबका विकास का नारा हकीकत से कोसों दूर हो चुका है। सरकार यह जताने पर लगी है कि वह कुछ भी करेगी, लेकिन उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। सरकार मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। सरकार के कथनी और करनी में फर्क है।
-चौधरी इफराहीम हुसैन, इस्लामिक धर्मगुरु
हज सब्सिडी खत्म करके हम लोगों से हक छीना गया है। सरकार सब्सिडी देकर उन पर एहसान नहीं कर रही थी, बल्कि इसके एवज में टैक्स आदि दे रहे थे। सरकार दोहरी नीति अपना रही है। एक तरफ मुझसे सब्सिडी छीन रही है, तो दूसरी तरफ हिंदू भाइयों को सब्सिडी दी जा रही है।
-गुलजार अहमद, समाजसेवी