बाल विकास सेवा व पुष्टाहार विभाग की 3031 आंगनबाड़ी और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की 24 टीमें मिलकर पांच वर्षों में महज 110 कुपोषितों को एनआरसी में उपचार दिला पाई हैं। आलम ये है कि कुपोषितों के उपचार का ढाई से तीन लाख का फंड एनआरसी से हर वर्ष सरकार को वापस लौट रहा है। लक्ष्मी प्रकरण सामने आने के बाद कुपोषितों पर अमर उजाला की पड़ताल जारी है। इसी पड़ताल में यह तथ्य सामने आए हैं।
आरबीएसके की टीमें सर्वे तो कर रही हैं, लेकिन मात्र पीएचसी में कुपोषित बच्चों को भर्ती कराकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रही हैं, जबकि अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराना चाहिए। पिछले दिनों समीक्षा में डीएम ने भी इस पर नाराजगी जताई थी। - श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
अलीगढ़ में अंडर 5 बच्चों के आंकड़े
356172 कुल बच्चे
52896 कुल कुपोषित
16935 अति कुपोषित
35961 35961
आरबीएसके की 24 टीमों का काम 2017 में 20 कुपोषित भर्ती कराए। आरबीएसके टीमों का गठन 2016 में ही किया गया है। 2017 में इनके द्वारा भर्ती कुपोषित ज्यादातर अकराबाद ब्लॉक क्षेत्र के हैं।
आंगनबाड़ी का छह वर्ष का काम
2012 में 4 कुपोषित भर्ती कराए। 2013 में 4 कुपोषित भर्ती कराए।
2014 में 5 कुपोषित भर्ती कराए। 2015 में 34 कुपोषित भर्ती कराए।
2016 में 34 कुपोषित भर्ती कराए। 2017 में 9 कुपोषित भर्ती कराए।
ज्यादातर कुपोषित लोधा और धनीपुर ब्लॉक क्षेत्र के हैं।
अपना एनआरसी और डीआईसी है आदर्श
यूं तो यूपी भर में पोषण पुनर्वास केंद्र हैं, लेकिन अपना एनआरसी बाकियों से कई मामलों में आदर्श है। खास बात ये है कि इस केंद्र के कोआर्डिनेटर प्रो. सैय्यद मनाजर अली अलीगढ़ केंद्र के प्रभारी होने के साथ इस मिशन के राष्ट्रीय प्रशिक्षक भी हैं। प्रो. सैय्यद मनाजर अली को पीडीएट्रिक में लंबा अनुभव है। इस तरह अलीगढ़ का एनआरसी इस मिशन में रिसर्च सेंटर की भी भूमिका निभाता है। बस बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और आरबीएसके टीमों की लापरवाहियों से अधिक से अधिक कुपोषितों को पोषित करने में अव्वल नहीं बन पा रहा। इसी तरह यहां का डीआईसी सूबे में एकमात्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है। जेएन मेडिकल कॉलेज के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने गत वर्ष जुलाई में ही इसकी स्थापना की है। जल्द ही यहां कार्डियक सर्जरी भी शुरू की जा रही है।
मेडिकल कॉलेज ने दिए 959 कुपोषित
एनआरसी की स्थापना मेडिकल कॉलेज के वार्ड 16 में 2011 में हुई थी। तब से अब तक कुल 1069 कुपोषित बच्चों को इस केंद्र में उपचार मिल चुका है। इनमें 90 फीसदी बच्चे मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और वार्ड से यहां भेजे गए। वो महज 110 बच्चे ही भर्ती करा पाए। वर्तमान में भी यहां पांच बच्चे भर्ती हैं। जिनमें दो बच्चे ही आरबीएसके टीम के हैं।
अब तक कुपोषितों का 10 लाख लौटा
एनआरसी पर मोटी रकम खर्च हो रही है। अलीगढ़ में केंद्र की स्थापना तो 2011 में यूनिसेफ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने मिलकर की थी, लेकिन जुलाई 2014 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यूपी द्वारा ही ये केंद्र संचालित किया जा रहा है। केंद्र में कुपोषितों के लिए 10 बेड हैं और हर वर्ष सात लाख 80 हजार रुपये का फंड भी आता है। ये फंड सिर्फ यहां भर्ती कुपोषितों के पोषण पर ही खर्च किया जाता है। कुपोषित बच्चे के साथ उसकी मां को भी तीनों वक्त के खाने के अलावा 50 रुपये बतौर भत्ता भी दिया जाता है। वैसे तो कुपोषित बच्चे को 15 दिन यहां भर्ती रखना होता है, लेकिन जब तक 15 फीसदी वजन बच्चे का न बढ़ जाए, तब तक डिस्चार्ज नहीं किया जाता। यहां के स्टाफ का वेतन जोड़ लें तो सरकार सालाना मोटी रकम खर्च कर रही है। पर्याप्त कुपोषित बच्चे न मिलने पर 2017 में एनआरसी ने सात लाख 80 हजार में से तीन लाख रुपये सरकार को लौटाए हैं। इसी तरह 2014 से अब तक करीब 10 लाख रुपये लौटाए जा चुके हैं।