मिलन प्रभात ने वह दौर भी याद किया जब इसी घर में साहित्य के दिग्गजों का आना-जाना लगा रहता था। उन्होंने बताया कि इसी आंगन में उन्होंने राही मासूम रजा और प्रो. शहरयार जैसे महान रचनाकारों को अपने पिता के साथ घंटों साहित्य चर्चा करते देखा था। एएमयू से अपनी शिक्षा पूरी करने वाले मिलन के लिए यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि गीतों की एक जीवंत पाठशाला है।
नीरज के लिखे कुछ कालजयी गीत
- कारवां गुजर गया- नई उमर की नई फसल
- फूलों के रंग से दिल की कलम से - प्रेम पुजारी
- रंगीला रे तेरे रंग में यूं रंगा है मेरा मन- प्रेम पुजारी
- लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में - कन्यादान
- ए भाई जरा देख के चलो - मेरा नाम जोकर
- दिल आज शायर है गम आज नगमा है - गैंबलर
- शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब - प्रेम पुजारी
- बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं - पहचान
- खिलते हैं गुल यहां, खिल के बिखरने को - शर्मीली