ईदुल अजहा (बकरीद) का त्योहार के चलते बकरों की मंडियां सज जाती हैं। बकरों की बिक्री में तेजी आनी शुरू हो गई, क्योंकि त्योहार में 11-12 दिन बचे हैं। हालांकि, पिछले वर्षों के मुकाबले बकरों की कीमतों में उछाल आया है।
कोरोना महामारी में बकरों की बिक्री अनुमान के हिसाब से ज्यादा नहीं हो पाई थी, क्योंकि आमदनी का जरिया कम हो गया था। कारोबार और धंधा मंदा हो गया था। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हुई और कारोबार पटरी पर लौट आया, जिससे जीवनगढ़, जमालपुर, शमशाद मार्केट, शाहजमाल से लेकर ऊपरकोट में बकरों की मंडी सजने लगी है। महंगाई का असर बकरों की कीमतों में भी पड़ा है, जो बकरे पिछले साल 10-11 हजार रुपये के थे, वह इस बार 13-14 हजार रुपये के बिक रहे हैं। वजन के हिसाब से बकरों की कीमतें व्यापारी मांग रहे हैं। खरीदार आसिफ ने बताया कि त्योहार से एक-दो दिन पहले बकरा काफी महंगा हो जाता है, इसलिए अभी खरीद लिया है।
कुर्बानी को लेकर उड़ी अफवाह पर लगा विराम
शाहजमाल स्थित ईदगाह पर पहुंचे डीआईजी दीपक कुमार ने कुर्बानी को लेकर उड़ी अफवाह को अफवाह बताया। कहा, जिस तरह से पहले से कुर्बानी होती आ रही है, वैसे ही होगी। अलबत्ता, प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी प्रतिबंधित रहेगी। कोरोना महामारी में त्योहार उस उत्साह और उमंग के साथ लोग नहीं मना पाए, जिस तरह मनाते थे। अब उसी उत्साह व उमंग से त्योहार मनाएंगे। डीआईजी ने मौके पर मौजूद लोगों के सवालों का जवाब भी दिया।
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बड़े जानवर के हिस्से का अलग-अलग हिसाब
भैंस, पड्डा की कुर्बानी में सात लोग हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी के लिए शहर में अलग-अलग कीमतें निर्धारित की गई है। कोई तीन हजार तो कोई चार हजार रुपये तय कर रखा है। हालांकि, जो कीमतों की दलीलें दी जा रही हैं, उसमें जानवरों का वजन बताया जा रहा है।