बबीता लाती, सुखाराम तलाशता था खरीदार
पुलिस के मुताबिक राजस्थान के डींग का रहने वाला सुखाराम अलीगढ़ के गोंडा क्षेत्र में रह रहा था। आरोप है कि वह बबीता की लाई बच्चियों को ऐसे परिवारों तक पहुंचाता था, जहां शादी के लिए लड़की की तलाश थी। पुलिस के अनुसार बच्चियों की कथित कीमत 70 हजार से एक लाख रुपये तक तय होती थी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में घरेलू काम के लिए भी उन्हें भेजे जाने की आशंका जताई गई है।
फिर एक बच्ची ने उठाया मोबाइल
इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी टप्पल के मौर गांव में सामने आई। पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ की एक नाबालिग बच्ची को विनोद जाट के यहां पहुंचाया गया था। आरोप है कि उसकी जबरन शादी करा दी गई और घर में उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना की गई। बच्ची को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। तभी उसकी नजर घर की बहू के मोबाइल फोन पर पड़ी। उसने चुपचाप मोबाइल का पैटर्न लॉक देखा। मौका मिला तो फोन उठाया और डायल 112 कर दिया। अंकल, मुझे यहां बंधक बनाया गया है... मुझे बचा लीजिए। इस कॉल के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार परिवार ने बच्ची को घर के अंदर कर दिया और टीम को गुमराह करते हुए कहा कि फोन गलती से हो गया होगा। पुलिस लौट गई, लेकिन बच्ची ने हिम्मत नहीं छोड़ी।
दूसरी बार की कॉल ने खोल दी पूरी कहानी
7 अगस्त 2026 को बच्ची मौका पाकर घर से निकल गई। रास्ते में एक राहगीर से फोन मांगा और दोबारा 112 पर कॉल की। इस बार उसने पुलिस को पूरी कहानी बताई। रेलवे स्टेशन पर मिलने से लेकर बबीता उर्फ चाची और सुखाराम तक पहुंचने वाली कड़ियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी। बच्ची के बताए सुरागों पर जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों को पकड़ना शुरू किया। तीन नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया गया और महिला सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एक कॉल से खुलीं कई कड़ियां
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बबीता उर्फ चाची, सुखाराम उर्फ महावीर और तीन कथित खरीदार शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ और एनसीआर तक लाया गया। एक बच्ची के हाथ लगा मोबाइल इस कथित नेटवर्क की सबसे कमजोर कड़ी बन गया। उसने 112 पर कॉल की और पुलिस को उस रास्ते तक पहुंचा दिया, जहां से बच्चियों की कथित खरीद-फरोख्त का पूरा खेल सामने आने लगा।