मामले में पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के बाद हत्या की धारा में चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान शशि चौहान की एक अन्य विवाद के दौरान 2017 में नई बस्ती में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद अकेले गौरव चौधरी के खिलाफ ट्रायल चला। सत्र परीक्षण के दौरान कमजोर साक्ष्यों के आधार पर गौरव को इस हत्या के आरोप से बरी किया गया है। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी रामबाबू शर्मा व नीरज चौहान एडवोकेट ने की। उन्होंने बताया कि अदालत ने सही दलीलों को स्वीकारते हुए फैसला सुनाया है।
कुल 13 गवाह, पुलिस को दिया बयान भी न आया काम
इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। जिनमें वादी चाचा, मां, पत्नी, अस्पताल लाने वाला रिश्तेदार युवक, फैक्टरी स्वामी सहित अन्य पुलिस व अस्पताल के गवाह शामिल हैं। इसके अलावा विवेचक ने घायल का बयान 161 के तहत दर्ज किया। मगर कोई साक्ष्य अदालत में काम नहीं आया। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपनी ओर से तमाम तर्क दिए गए। लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद मुकदमे में आरोपी को बरी किया गया है।
हमें न्याय की उम्मीद थी। पूरे मुकदमे में हमने मजबूत पैरवी की। खुद पीयूष का बयान पुलिस ने लिखा था, उसे अदालत में मृत्यु पूर्व बयान के तौर पर स्वीकारने की अपील की गई। मगर हमारी दलील नहीं स्वीकारी गई हैं। अब इस मामले में हम फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।-विपिन बिहारी गुप्ता, वादी/मृतक के चाचा
अदालत के समक्ष हमने अपना पक्ष बहुत मजबूती से रखा था। काफी साक्ष्य व गवाह इस मुकदमे में हैं। मगर हमारे पक्ष को नजरंदाज कर फैसला किया गया है। अब फैसले का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद अपील की जाएगी।-जेपी राजपूत, एडीजीसी अभियोजन