जैसे ही युवकों के डूबने का शोर मचा तो घाट पर मौजूद दुकानदार दौड़ पड़े। नदी में छलांग लगाते हुए वह उस स्थान पर पहुंचे, जहां युवक डूबे थे। उन्होंने तीन युवकों को तत्काल पानी से बाहर निकाल लिया। यह सभी दुकानदार स्थानीय और निषाद समाज से हैं और गोताखोर भी है। रामनवमी पर सांकरा घाट में गंगा स्नान के लिए लोग पहुंचते हैं, इसलिए 10-12 लोगों ने अपनी दुकानें घाट पर लगा रखी थीं। यही वजह है कि समय से मदद मिल गई और तीन युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रामनवमी पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण सांकरा चौकी के सिपाही भी घाट पर सुरक्षा के लिए मौजूद थे। उन्होंने भी युवकों को निकालने के लिए दुकानदारों और ग्रामीणों की मदद ली।
मना कर रहे थे लोग, नहीं माने युवक
घाट पर चर्चा थी कि मुंडन संस्कार के बाद जब लोग गंगा नदी में स्नान करने लगे तो ज्यादातर किनारे पर ही स्नान कर रहे थे। यह चारों युवक आपस में बात करते हुए गहरे पानी में जाने लगे तो मौजूद गांव के अन्य लोगों ने उन्हें किनारे पर ही स्नान करने के लिए कहा। हालांकि चारों ने किसी की बात नहीं सुनी और आगे बढ़ते चले गए। गहराई में जाते ही अचानक पैरों के नीचे से बालू कटी जिससे चारों डूब गए थे।