अलीगढ़ में गोंडा के गांव नगला कुंजी में पुरानी रंजिश में एक भाई की हत्या व दूसरे पर हमले के चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ में 32-32 हजार रुपये अर्थदंड भी नियत किया है। यह निर्णय एडीजे-3 राकेश वशिष्ठ की अदालत ने सुनाया है। अर्थदंड की राशि में से एक लाख रुपये पीडि़त पक्ष को देने के आदेश दिए है।
वादी मुकदमा बच्चू सिंह के अनुसार 30 जून की देर शाम उनका बेटा कुशल उर्फ कालू दरवाजे पर खड़ा था। नामजद पवन अपने कुछ साथियों संग आया व उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में जब वह घायल कुशल को लेकर थाने जाने लगे तो पवन फिर से साथियों संग आया और फिर से रास्ता रोककर हमला कर दिया। इस बार भी लाठी डंडों व तमंचे की बट से प्रहार कर दूसरे बेटे देवेंद्र की नृशंसतापूर्वक हत्या कर दी।
तहरीर के आधार पर पवन को नामजद किया गया, जबकि विवेचना में गांव के चूचू उर्फ जीतू, वीरा उर्फ वीरपाल, पड़ोसी गांव नुनेरा के संगीत व पींजरी के पूसी उर्फ पुष्पेंद्र के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने इन पांचों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। जिसमें सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर पवन, जीतू, संगीत व पुष्पेंद्र को दोषी करार देकर सजा सुनाई है। पवन पर हथियार बरामदगी की धारा में पांच हजार रुपये अतिरिक्त अर्थदंड लगाया है। वहीं वीरा उर्फ वीरपाल की पत्रावली अलग होने के कारण उसके मामले में अभी निर्णय नहीं हो सका है।
चश्मदीद की गवाही बनी सजा का आधार
एडीजीसी अमर सिंह तोमर ने बताया कि पुलिस ने केस डायरी में कुल 28 गवाह बनाए थे। 11 गवाह अदालत में कराए गए। इनमें वादी बच्चू के अलावा उसका एक बेटा राहुल, घायल कुशल, दो चिकित्सक डॉ. सुंदर व डॉ. मुनाजिर, एसओ, तीन दरोगा, दो पुलिसकर्मी शामिल रहे। इनमें बेटे राहुल की गवाही को अदालत ने सबसे बड़ा आधार माना है। पुलिस ने विवेचना में अन्य के नाम बढ़ाए थे। उन्हें राहुल ने चश्मदीद के रूप में पहचाना है। उसी आधार पर सजा सुनाई गई है।