डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के पूर्व कुलपति डॉ. शांति स्वरूप गुप्ता (एसएस गुप्ता) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 98 वर्ष थे। उन्होंने सोमवार को दोपहर 12:40 बजे वरुण ट्रामा सेंटर में अंतिम सांस ली। शाम पांच बजे चंदनिया श्मशान गृह में उनकी चिता को मुखाग्नि उनके बेटे आलोक गुप्ता ने दी।
दरियागंज (दिल्ली) निवासी डॉ. गुप्ता ने जनकपुरी अलीगढ़ में अपने पिता इंजीनियर विष्णु स्वरूप गुप्ता के नाम पर ‘विष्णु निवास’ बनाया था। वह डीएस कॉलेज में वर्ष 1960 से 1974 तक अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष रहे। वर्ष 1974 से 1987 तक प्राचार्य पद का दायित्व संभाला। वह 30 जून वर्ष 1987 में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हो गए।
तीन साल के बाद 24 सितंबर वर्ष 1991 में डॉ. गुप्ता ने डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति का पदभार संभाला। वह वर्ष 1994 तक कुलपति रहे। 10 महीने पहले उनकी पत्नी डॉ. पुष्पलता का निधन हो गया था। वह टीकाराम कन्या महाविद्यालय में शिक्षिका थीं। डॉ. गुप्ता के इकलौते बेटे आलोक गुप्ता उद्यमी हैं, जबकि बेटी सीमा गुप्ता दिल्ली में तैनात एडीजी आलोक शर्मा की पत्नी हैं। डॉ. गुप्ता के अंतिम संस्कार में एडीजी आलोक शर्मा, आईजी डॉ. संजीव गुप्ता, एसएसपी राजेश पांडेय, औटा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह, प्राचार्य डॉ. हेम प्रकाश, डॉ. ओपी बंसल आदि मौजूद रहे।
राज्य सरकार से मिल चुका पुरस्कार
डॉ. गुप्ता 10 से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके हैं। उन्हें वर्ष 1980 में उनकी पुस्तक ‘इकोनॉमिक्स फिलॉसफी ऑफ महात्मा गांधी’ पर राज्य सरकार ने पुरस्कार भी दिया था। उनकी 11 पुस्तकें ऑनलाइन हैं, जिसे मुफ्त में पढ़ सकते हैं। हिंदू संस्कारों पर डॉ. गुप्ता शोध भी कर चुके हैं।
अमर उजाला से रहा खास नाता
डॉ. गुप्ता को अमर उजाला से खास लगाव था। जब भी अखबार की बातें होती थीं, उनकी जुबां पर ‘अमर उजाला’ का नाम आ जाता था। वह खुद भी कहते थे कि अमर उजाला उन्हें पसंद है। इस पसंद को उनके दामाद एडीजी आलोक शर्मा ने भी साझा किया।
शिक्षा के प्रति समर्पित रहा डॉ. गुप्ता का जीवन
प्रज्ञा प्रबोध वैचारिक मंच के संरक्षक व डॉ. बीआर अंबेडकर विवि आगरा के पूर्व कुलपति डॉ. एसएस गुप्ता के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की गई। प्रांतीय संयोजक डॉ. वीपी पांडेय ने कहा कि डॉ. गुप्ता का समूचा जीवन शिक्षा, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहा। अलीगढ़ ने एक ऐसे ओजस्वी शिक्षाविद् और विचारक को खो दिया है, जिसकी प्रतिपूर्ति संभव नहीं है। पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा ने दुख जताया है।