मो.आरिफ खुद संपन्न परिवार से आते हैं। सियासत में सक्रिय रहने के चलते उन पर खुद के लाइसेंसी हथियार भी हैं। दस दिन पहले हुए विवाद के बाद उनके पास किसी न किसी खुराफात की खबरें भी आ रही थीं। मगर उनका मानना था कि इतनी हिमाकत शायद न करें। मगर आरोपी दस दिन से प्लानिंग बना रहे थे। आज जब आरिफ बिना हथियार के कस्बे में दावत खाने निकले तो आरोपियों को अवसर मिल गया। उन्होंने घटना को अंजाम दे दिया।
ठेकेदारी छोड़ सियासत में आए
आरिफ के पिता चीफ इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए। खुद वे पढ़े लिखे हैं। वर्ष 2012 में अचानक उन्होंने अपनी ठेकेदारी छोडक़र सियासत में कदम रखा। छर्रा विधानसभा से निर्दल चुनाव लड़े थे। मगर दस हजार वोटों पर सिमट गए। इसके बाद उन्होंने पिलखना की चेयरमैनी पर निर्दलीय दावा ठोका। तब से लगातार तीन बार से उस पर काबिज हैं। खास बात हैं कि वे सपा में सक्रिय हो गए। मगर चेयरमैनी पर लगातार तीनों बार निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते। तीनों बार सपा का उन्हें बाहर से समर्थन रहा। एक बार खुद, एक बार मां व अब पत्नी को चेयरमैन बनाया। 2022 के चुनाव में आरिफ ने कोल से सपा से विधायकी का टिकट भी मांगा था। मगर मिल नहीं पाया।
पिलखना के पूर्व चेयरमैन पर हमले की खबर पर आनन फानन घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। इस बीच भीड़ की ओर से भी भागते हमलावरों पर ईंट पत्थर बरसाए गए। मगर आरिफ को घायल देख भीड़ उनके इलाज की व्यवस्था में जुट गई। तमाम लोग घटनास्थल व बाद में मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सपा जिला महासचिव मनोज यादव, महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी, खुसरो खान, आमिर आबिद, जस्सू शेरवानी आदि तमाम नेता मेडिकल कालेज पहुंच गए। घटना की जानकारी करते हुए अधिकारियों से बात की।
बताए गए ये नाम, सीसीटीवी देख रही पुलिस
एसपी देहात के अनुसार इस घटना को लेकर अब तक जो नाम खुद घायल व अन्य साथियों द्वारा बताए गए हैं। उनमें भाजपा से चेयरमैन प्रत्याशी रहीं जमीला खातून के बेटे और उनके साले हैं। उनकी तलाश में टीमें लग गई हैं। साथ में घटनास्थल के बाद से लेकर आरोपियों के घर व कस्बे से भागने वाले रास्तों पर सीसीटीवी दिखवाए जा रहे हैं।