इधर, परिवार की ओर से बीमारी का हवाला देकर उन्हें जेल में उपचार न मिलने की दलील अदालत व पुलिस प्रशासन में दी गई। बेटे विनय के अनुसार, तमाम प्रयास के बाद हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें नौ नवंबर को जेएन मेडिकल कॉलेज दाखिल किया गया था। दो दिसंबर को जेएन मेडिकल कॉलेज से छुट्टी कराकर जेल ले जाया गया। तीन दिसंबर की देर रात उन्हें कारागार से फिर जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। इस खबर पर परिवार के तमाम सदस्य व समर्थक मेडिकल कॉलेज पहुंच गए।
बेटे का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने उन्हें जानकारी दी है कि उन्हें मृत अवस्था में ही लाया गया है। मुंह से झाग निकल रहा था, उन्हें जानबूझकर मारने की साजिश रची गई है। बेटे के अनुसार, उनकी मां की जमानत मंजूर हो गई थी। शुक्रवार को रिहाई होना तय था। मगर एक जमानती का पुलिस ने जानबूझकर सत्यापन एक पुराने मुकदमे के चलते नहीं किया। इसके चलते जमानती बदला गया और अब शनिवार को रिहाई हो सकती थी। इसी बीच यह मौत इसी ओर इशारा कर रही है। इसे लेकर परिवार की ओर से हंगामा किया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया था। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के अनुसार मौत का मेमो प्राप्त हो गया है। बाकी पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया कराई जाएगी।
जेएन मेडिकल में भर्ती बंदी रेनू शर्मा को बृहस्पतिवार सुबह जेल दाखिल किया गया था। देर रात हालत बिगड़ने पर फिर आनन-फानन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मगर वहां मृत घोषित कर दिया गया। अब पूरे मामले में मजिस्ट्रेटी जांच होगी। शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।-विपिन मिश्रा, वरिष्ठ अधीक्षक कारागार