फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच बार कांग्रेस ने बनाया है जिला पंचायत अध्यक्ष

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अब तक सर्वाधिक पांच बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। मई 1948 में पहली बार कांग्रेस के नवाब सिंह अध्यक्ष बने थे। इसके बाद साहब सिंह, कुशलपाल सिंह, नवाब सिंह (दूसरी बार) और श्रीनिवास कांग्रेस के झंडे तले अध्यक्ष बने। आजादी के बाद से लगातार पांच बार कांग्रेसी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे।
विज्ञापन

कांग्रेस ये सीट पहली बार जनता दल के महीपाल ने छीनी थी। जनता दल को हराकर फिर भाजपा की उमेश कुमारी अध्यक्ष बनीं। उमेश कुमारी का कार्यकाल तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह के कारण चर्चा में रहा था, उस वक्त सीएम से कुछ मतभेद होने से उमेश कुमारी की मुश्किलें बढ़ गई थीं और वह अदालत के आदेश के बाद अध्यक्ष पद पर बहाल हुई थीं। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रशासक की नियुक्ति हुई थी।
उमेश कुमारी के बाद रालोद के समर्थन से तेजवीर सिंह गुड्डू अध्यक्ष बने, उनको राजवीर सिंह राजू भैया का साथ मिला था। इसी दौर में जिला पंचायत की राजनीति में पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह की एंट्री हुई और तब से लेकर अब तक वह लगातार किंगमेकर की भूमिका रहे। ठा. जयवीर सिंह ने पूर्व विधायक स्व.चौ. मलखान सिंह के साथ मिल कर पहली बार रामसखी कठेरिया को अध्यक्ष बनवाया था।
विज्ञापन

रामसखी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2012 में सपा की सरकार बनीं तो वह भाजपा में शामिल हो गईं और उन्होंने इगलास से विधायकी का चुनाव लड़ा। रामसखी के बाद जयवीर सिंह ने नये चेहरे के रूप में बसपा के बैनर तले चौ. सुधीर सिंह को मैदान में उतारा और वह भी जीते। चौ. सुधीर सिंह के बाद जयवीर सिंह ने अपने भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू को अध्यक्ष बनवा कर अपनी ताकत का अहसास कराया।
भाजपा सरकार बनने के बाद जब उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ तो जयवीर सिंह परिवार सहित भाजपाई हो गए। अब भाजपा की प्रत्याशी विजय सिंह की जीत में प्रमुख रणनीतिकारों में ठा. जयवीर सिंह का नाम शामिल है। जिनकी सधी हुई रणनीति से भाजपा इस कुर्सी पर काबिज हुई है।
निर्दलीय खेमे से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह का भी खास महत्व है, जो भाजपा के प्रांत सह संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह की पहल पर भाजपाई हुए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के अब तक के सफर पर गौर करें तो सर्वाधिक पांच अध्यक्ष कांग्रेस से, जनता दल और रालोद से एक-एक और बसपा से तीन अध्यक्ष बने हैं। भाजपा से दो अध्यक्ष सीधे तौर पर चुने गए हैं जबकि उपेंद्र सिंह नीटू कार्यकाल के दौरान भाजपाई हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें