कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा हो गया है। अब नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया है कि विधान सभा चुनाव में भाजपा जनपद की सभी सातों सीटें पुन: जीत लेगी। जिला पंचायत चुनाव के नतीजे तो यहीं कहते हैं कि भाजपा विधान सभा चुनाव को लेकर किसी तरह का भ्रम मन में न पाले। किसी तरह 38 वोट मैनेज कर जिला पंचायत अध्यक्ष पद तो जीत लिया। विधान सभा चुनाव में जनपद के 26.35 लाख मतदाताओं को मैनेज करना आसान नहीं है।
जिला पंचायत चुनाव परिणाम पर नजर दौड़ाए तो भाजपा के 47 में से 38 प्रत्याशी चारो खाने चित हो गए। बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले छह प्रत्याशियों को जनता से सिर पर बैठाकर भाजपा के उम्मीदवारों को ठुकरा दिया। दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के बाद जाट समाज के लोग भी भाजपा से चिढ़े हैं।
यहीं कारण है कि जाट लैंड में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी द्वारा जाट समाज से 11 नेताओं को चुनाव में उतारा गया था। उसमें से 10 बुरी तरह पराजित हुए। वार्ड नंबर 19 से एक मात्र कृष्णपाल सिंह सफल हुए। भाजपा प्रत्याशियों को धूल चटाकर जाट समाज के 15 लोग निर्वाचित हो गए।
तमाम हथकंडे अपनाकर मात्र 9 वार्ड में जीत दर्ज करने वाली भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 38 सदस्यों का वोट हासिल करने में कामयाब रही। सच्चाई तो यह है कि जिला पंचायत चुनाव में जनता ने भाजपा को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया था। निर्वाचित जन प्रतिनिधि जनभावना के साथ खिलवाड़ कर भाजपा की गोद में जा बैठे। जिला पंचायत अध्यक्ष पद जीतने के बाद भाजपा नेताओं ने दावा करना शुरू कर दिया कि विधान सभा चुनाव भी पूर्ण बहुमत से जीत लेंगे।
सपा के महासचिव मनोज यादव कहते हैं कि भाजपा किसी गलतफहमी में नहीं रहे। 38 जिला पंचायत सदस्यों को मैनेज कर किसी तरह चुनाव जीत लिया। विधान सभा चुनाव में सात विधान सभा क्षेत्र के 26.35 लाख मतदाताओं को मैनेज करना आसान नहीं है। जनभावना के साथ हुए खिलवाड़ का बदला लोग विधानसभा चुनाव में चुकाएंगे।
जिला पंचायत का चुनाव स्थानीय स्तर का चुनाव होता है। इस चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं। विधान सभा एवं लोकसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं। हम 2022 में विधान सभा चुनाव में सभी सीटें जीतेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जनता दिलों जान से चाहती है। - चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा