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Fish Market: ठंड शुरू होते ही गरमाया मछली कारोबार, 150 करोड़ की होगी कमाई, इन मछलियों की है डिमांड

Tue, 19 Nov 2024 10:37 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अतरौली में मत्स्य आहार मिल स्थापित है, जहां मछलियों के खाने के लिए दाना तैयार किया जाता है। यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तक दाना बनता है। इसी तरह टप्पल के गांव भोजाका और गोंडा रोड स्थित शहरी मदनगढ़ी में हैचरी स्थापित हैं, जहां मछलियों का बीज तैयार किया जाता है।
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रसलगंज मछली बाजार में बिगहेड मछली - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सर्दी का मौसम शुरू होते ही अलीगढ़ जिले में मछली की बिक्री बढ़ गई है। इस साल करीब 150 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। मार्केट में दस किस्म की मछलियां हैं, जिनमें मिठास के कारण रोहू और कम कांटे के कारण पंगेशियस मछली की डिमांड ज्यादा है। शोल और सिंघी महंगी मछलियां हैं, जिनकी डिमांड खास वर्ग में है। इसकी कीमत 500 रुपये से 800 रुपये प्रतिकिलो तक है।

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मछली पालकों ने मछली का आहार बनाने और बीज उत्पादन के केंद्र भी स्थापित किए हैं। अतरौली में मत्स्य आहार मिल स्थापित है, जहां मछलियों के खाने के लिए दाना तैयार किया जाता है। यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तक दाना बनता है। इसी तरह टप्पल के गांव भोजाका और गोंडा रोड स्थित शहरी मदनगढ़ी में हैचरी स्थापित हैं, जहां मछलियों का बीज तैयार किया जाता है।

मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं तैयार की हैं। जिनका लाभ मछली पालक ले रहे हैं। इसके अलावा प्रतिबंधित मछलियों को बाजार में आने से रोकने के लिए लगातार निरीक्षण किया जाता है। काफी समय से इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।- प्रियंका आर्य, सहायक निदेशक मत्स्य

बिगहेड के उत्पादन से बचते हैं मछली पालक

बिगहेड शाकाहारी मछली है, लेकिन ये तालाब में पल रहीं अन्य मछलियों का आहार खा जाती है। जिससे अन्य किस्मों की मछलियां तालाब में जिंदा नहीं रह पातीं। ज्यादा आहार खाने का कारण इसका सिर बड़ा होना बताया जाता है। इसके चलते मछली पालक बिगहेड के उत्पादन से बचते हैं। हालांकि यह मछली दिल्ली तथा आसपास के जिलों से अलीगढ़ पहुंचती है और बाजार में बेची जाती है।

जिले में 450 तालाबों में है मछली पालन
जिले में 645 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन होता है, जिसमें 8500 टन उत्पादन होता है। खैर तहसील मछली उत्पादन के लिए बड़ा क्षेत्र है। यहां से दिल्ली और नोएडा तक मछलियां जाती हैं। इसके अलावा बरौली, अकराबाद, गंगीरी, गभाना, अतरौली में मछली का बड़ा उत्पादन हैं। इन क्षेत्रों में कुछ तालाबों का क्षेत्रफल 200 बीघा तक है। जिले में एक दर्जन से ज्यादा किस्म की मछलियाें का उत्पादन है, जिनमें पंगेशियस, रोहू, कतला, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, मृगल, कॉमन कार्प, तिलापिया, शोल, सिंघी शामिल हैं। करई और सिंघाड़ा मछली आसपास के जिलों से आती हैं। रसलगंज में मछली दुकानदार दिलशाद ने बताया कि बाजार में रोहू की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है, जिसकी कीमत 200 रुपये प्रतिकिलो है। कम कीमत की बात करें तो करई मछली 140 रुपये प्रतिकिलो है।

प्रतिबंधित मछली थाई मांगुर की तलाश में रहता है विभाग
विदेशी मछली थाई मांगुर पर प्रतिबंध लगा है, लेकिन समय-समय पर यह मछली बाजार में आती है। इस पर रोकथाम के लिए मत्स्य पालन विभाग बाजार का निरीक्षण करता है। ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक इंद्रपाल सिंह ने बताया कि सन 2021 में शहर के रसलगंज मछली बाजार में 3 क्विंटल और गभाना टोल प्लाजा पर गाड़ी में 8 क्विंटल मांगुर मछली पकड़ी गई थी। इसके बाद से लगातार सतर्कता बरती जा रही है।
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मछली पालकों के लिए योजनाएं

केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने मछली पालकों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिससे मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिले। इसमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, निषादराज योजना, मछुआ दुर्घटना योजना, मछुआ कल्याण कोष, सघन मत्स्य पालन के लिए एरिएशन सिस्टम की स्थापना आदि योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत मत्स्य पालन करने पर सरकार 40 से 60 प्रतिशत धनराशि पर सब्सिडी देती है।

सर्दी में 70 फीसदी तक बढ़ जाती है डिमांड
गर्मी के सीजन में मछली की मांग कम रहती है, लेकिन जैसे-जैसे मौसम में ठंडक बढ़ती है मछली का बाजार गरमाने लगता है। रसलगंज मछली बाजार के दुकानदार अब्दुल वहीद ने बताया कि हर साल अक्तूबर के बाद से ही मछली की मांग बढ़ जाती है। दिसंबर तक 70 फीसदी तक बाजार उछाल लेता है। उस समय मांग के अनुसार बाजार में माल नहीं होता।

जिले के मछली उत्पादन के टॉप फाइव तालाब
मछली उत्पादन का कार्य जिले में लगातार बढ़ रहा है। अलीगढ़ में 200 बीघा क्षेत्रफल से 100 बीघा क्षेत्रफल में पांच बड़े तालाब हैं, जहां मछली उत्पादन किया जाता है। इनमें बरौली कसबे का गांव रामनगर, अकराबाद का गांव बरहद, गंगीरी का गांव शाहजहांपुर बैजना, गभाना का गांव मोहरैना, अतरौली का गांव जादौंपुर शामिल है। इसके अलावा शेखा झील के निकट भी मछली उत्पादन का बड़ा केंद्र है।
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