पंडित दीनदयाल अस्पताल में एक परिवार की तीन पीढ़ियां कोरोना का इलाज करा रही हैं। इसमें पिता-पुत्र और पौत्र शामिल हैं। ये परिवार है सपा महानगर उपाध्यक्ष और अलीगढ़ रिटेलर्स केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री का। वह खुद, उनके पिता और बेटा इस संक्रमण से लड़ रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि उनको दवाओं के थोक बाजार फफाला से संक्रमण लगा।
अगर जिला प्रशासन के निर्देश पर अमल करते हुए उनको दवाओं की होम डिलीवरी मिलती तो ऐसा नहीं होता। उनके लिखित शिकायत के बाद भी इस मामले में ड्रग लाइसेंस विभाग और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। अब वह स्वस्थ होकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और मुकदमा दर्ज कराएंगे। तीनों ने कोरोना की जांच से लेकर अस्पताल तक पूरा हालात बयां किया। कैसे एक परिवार की स्थिति स्पष्ट होने में दस दिन लग रहे हैं। नाश्ता चाय खाना कैसा है..? क्यों लोग बाहर से खाना मंगाने को मजबूर हैं..?
दस दिन में स्पष्ट हुई परिवार की स्थिति
- महामंत्री और उनके बेटे का टेस्ट आठ जुलाई को हुआ। चार दिन बाद 12 जुलाई को रिपोर्ट आई, 13 जुलाई को वह अस्पताल में भर्ती हुए।
- 13 जुलाई को परिवार के बाकी लोगों का टेस्ट हुआ, इसकी रिपोर्ट 16 जुलाई को आई, महामंत्री के पिता भी पॉजिटिव निकले।
- 17 जुलाई को पिता भी दीनदयाल अस्पताल में भर्ती हो गए।
नाश्ता-खाना पौष्टिकता से बहुत दूर
सपा नेता ने बताया कि दीनदयाल अस्पताल में मिलने वाला नाश्ता और खाना पौष्टिकता से दूर है। इस कारण मजबूरी में उनको अपने घर से खाना मांगना पड़ता है। यहां सुबह चाय के साथ दलिया, पोहा दिया गया था। दोपहर में चार रोटी के साथ एक पतली दाल, सब्जी और प्याज परोसा जा रहा है। शाम को नाश्ते में कुछ नहीं। इसके बाद रात में दाल, सब्जी और रोटी के साथ प्याज आता है। दूध और मौसमी फल डायट चार्ट से गायब हैं। ये खाना ऐसा नहीं है कि इसको खाकर पौष्टिकता मिले और इम्युनिटी बढ़ाई जा सके। वह खुद चिकित्सा एवं दवाओं के जानकार हैं इसलिए ये बात दावे से कह रहे हैं।
हाइड्रोक्लोरोक्वीन के साथ एक दिन दूध, चार दिन पानी
सपा नेता के बेटे ने बताया कि कोरोना के इलाज में जरूरी हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा पांच दिन खिलाई जाती है। ये दवा दूध से खानी होती है। लेकिन एक दिन दूध मिलने के बाद चार दिन नहीं मिला। ऐसे में गरम दवा मरीजों को अन्य समस्याएं पैदा कर रही हैं।