अतरौली में यूरिया के लिए किसानों को कितना परेशान होना पड़ रहा है, इसे शायद ही वह समझ पाएं, जो खेती-बाड़ी नहीं करते। 5 अगस्त को बारिश में भीगने के साथ कीचड़ में गिरते-पड़ते और पुलिस की फटकार खाते हुए लाइन में किसान लगे रहे, ताकि खेतों में खड़ी फसल के लिए यूरिया पा सकें। इतना सब कुछ सहने के बावजूद दो-दो बोरी यूरिया ही उनके हाथ लगी।
जितनी यूरिया थी उसके हिसाब से वितरण किया गया है। आधार कार्ड और खतौनी लेकर प्रति किसान दो बोरी यूरिया दी गई है। -हरीराज सिंह, सचिव
मंगलवार की सुबह पांच से बजे से लाइन में लगना पड़ा। बारिश में भीगे। कीचड़ में गिरने से बचे, तब दो बोरी यूरिया मिल सकी। -राजेंद्र पहाड़गढ़ी
प्रशासन किसानों को यूरिया मुहैया करा पाने में विफल है। जब भी समिति में यूरिया आती है तो लाइन लंबी लाइन में जूझना पड़ता है।- विजेंद्र सिंह, गाजीपुर
निजी दुकानों में यूरिया मिल नहीं पा रही है। किसी दुकान पर है भी तो दुकानदार महंगे दाम पर लगेज खरीदने का दबाव बनाते हैं। - नीरज, हरचंदपुर
घर का काम-काज छोड़कर बारिश में भीगते हुए मंगलवार को सुबह से लाइन में लगना पड़ा। कपड़े भीग गए, तब दो बोरी खाद मिली।- विमलेश, अतरौली
मजदूरी भी नहीं छोड़ी जा सकती, लेकिन घर के पुरुष मजदूरी करने चले गए। मजबूरी में हमें ही यूरिया के लिए लाइन में लगना पड़ा। - संतोष देवी, गांव खेड़ा