कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस से उनके मामा के मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर एक जांच उनके पास आई। जिससे पता चला कि 13 मार्च 2023 में फराह बानो व उनके भाई मुस्तजाब मलिक ने नगर निगम में फर्जी तरीके से आवेदन देकर हमारे द्वारा बनवाया गया मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कराकर नया मृत्यु प्रमाण पत्र उन्हीं दस्तावेजों पर बनवा लिया। जिन दस्तावेजों पर हमने पहले प्रमाण पत्र बनवाया था। पूरी पत्रावली का प्रयोग इस फर्जीवाड़े में किया गया। जिसमें नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध रही। बिना जांच के नगर निगम ने नया प्रमाण पत्र बना दिया। यह उन्होंने गलत नीयत से किया गया। इस मामले में सीएम स्तर से शिकायत के बाद जांच के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई। सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार मामले में प्रारंभिक जांच में फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनना उजागर हुआ है। जिसमें नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध है। अब विवेचना में अब अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम द्वारा की जा रही जांच
इस मामले में नगर निगम ने भी गंभीर रुख अपनाया है। मामले में नगर आयुक्त ने उप नगर आयुक्त को जांच दी है। उनके स्तर से पूरे मामले में जांच की जा रही है कि किस तरह से यह फर्जीवाड़ा हुआ है।
एएमयू कोर्ट के सदस्य भी रहे थे वसीम अहमद
मूल रूप से एटा पटियाली के वसीम अहमद का परिवार अलीगढ़ आकर बस गया। यहां रहकर एएमयू में पढ़ाई के बीच वे राजनीति में सक्रिय हुए। जनता दल में वीपी सिंह के साथ जुड़कर राजनीति की शुरुआत करने वाले वसीम अहमद बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। राज्यसभा सदस्य रहते वे एएमयू कोर्ट व ईसी के सदस्य भी रहे थे। एएमयू मामलों में वे खासे सक्रिय रहते थे।
संबंधित वीडियो-