यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण में करोड़ों रुपये के घोटाले का जाल खैर तक बिछा है। इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियाें को लेकर ग्रेटर नोएडा पुलिस शुक्रवार को खैर उपनिबंधक कार्यालय पहुंची जहां जमीन संबंधी दस्तावेज खंगाले। इस चर्चित प्रकरण में आरोपी तहसीलदार रणवीर सिंह के दो सालों और एक भतीजे के नाम पर टप्पल इलाके में 200 बीघे जमीन है।
इस टीम के साथ जांच के लिए आए सीओ निशांत शर्मा के साथ आए तीन आरोपियों में मेरठ निवासी मनोज और गौरव तहसीलदार रणवीर सिंह के सगे साले हैं, जबकि अनिल को भतीजा बताया गया है। उन्हें पुलिस मेरठ जिला कारागार से लेकर आई थी। उनकी जानकारी पर उपनिबंधक कार्यालय में जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें टप्पल में लगभग दो सौ बीघे जमीन तीनों आरोपियों के नाम बैनामा पाई गई।
यह जमीन फर्जी कंपनी बनाकर इनके नाम पर खरीदी गई थी। बाद में इसी जमीन पर मोटा मुआवजा लिया गया था। यमुुना एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण में अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कंपनी बनाकर अपने रिश्तेदारों के नाम से जमीन खरीदने और उन्हें मुआवजा दिलाने का 126 करोड़ रुपये का घोटाला कुछ समय पहले प्रकाश में आया था।
मेरठ जेल में हैं पीसी गुप्ता
जांच के लिए आई पुलिस टीम के अनुसार घोटाले में मुख्य आरोपी पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता को 22 जून को मध्यप्रदेश के दतिया से गिरफ्तार किया गया था। दो जुलाई से वह मेरठ जेल में हैं। पीसी गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसी में डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का नाम भी शामिल था। पीसी गुप्ता की हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।