शहर के गांधी नेत्र चिकित्सालय में सालाना छह करोड़ खर्च हो रहे, लेकिन शासन से सिर्फ एक करोड़ रुपये की ही मदद मिल रही है, जो नाकाफी बताई जा रही है। हर साल सिर्फ डॉक्टर और स्टाफ को 4.80 करोड़ वेतन दिए जा रहे हैं। चिकित्सालय पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
चिकित्सालय के रखरखाव अन्य सुविधाओं के लिए हर साल शासन से एक करोड़ आठ लाख 50 हजार रुपये मिलते हैं। मार्च में शासन ने 36 लाख 50 हजार रुपये की तीसरी किस्त जारी की है। चिकित्सालय संचालन के लिए हर साल छह करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। शासन से मिलने वाली राशि के अतिरिक्त चिकित्सालय अपने स्रोत से राशि एकत्र करती है, जिससे चिकित्सालय का संचालन होता है।
चिकित्सालय में 120 डॉक्टर-कर्मचारी हैं, जिनके वेतन पर हर महीने 40 लाख रुपये खर्च होते हैं। ओपीडी में रोजाना करीब 400 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सालय के अधीक्षक मधुप लहरी ने बताया कि शासन से मिलने वाले एक करोड़ रुपये
आयुष्मान का 36 लाख बकाया
चिकित्सालय में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज तो लगातार हो रहा है, लेकिन सरकार पर करीब 36 लाख रुपये का बकाया भुगतान लंबित है। पहले से ही सीमित सरकारी सहायता और बढ़ते खर्च के बीच यह बकाया राशि संस्थान के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है।