तिहरे हत्याकांड के बाद से दहशत में जी रहे सतरापुर मढ़इयों के बाशिंदों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। अब तक आधा दर्जन परिवार अपने घरों में ताले लगाकर और सामान समेटकर जा चुके हैं।
सोमवार दुपहर पलायन कर रहे परिवारों से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनके खानदानियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है।
दहशत का आलम यह है कि जब तब आरोपियों के मन में आता है, वह गांव में व उनके इलाके में आकर फायरिंग कर दहशत फैताले हुए धमकाकर चले जाते हैं। उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस भी मूकदर्शक बनी रहती है।
इलाके के गांव सतरापुर में चुनावी रंजिश में 9 अक्तूबर की रात मां-बेटी व बेटे की बेरहमी से गलादबाकर हत्या की गई थी। तीनों की लाशें अलग-अलग स्थानों पर मिली थीं। अब तक की जांच में बेटी व मां से दुष्कर्म की बात भी सामने आई है। इस प्रकरण में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मुकदमे में उल्लेख है कि इससे पहले भी परिवार के एक पूर्व प्रधान की हत्या की जा चुकी है। उस हत्या का नामजद अभी तक फरार है और इस हत्या में भी वह नामजद है। उसी ने खुलेआम ऐलान किया था कि इस खानदान को मिटाकर रख दिया जाएगा।
अब हत्याकांड के बाद भी इन नामजदों की गिरफ्तारी की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसके चलते उनके हौसले बुलंद हैं और गांव में दीवारों पर पलायन करने वालों ने पुलिस के खिलाफ लिखा है कि वह लोग हमें धमकियां दे रहे हैं। इसलिए हम गांव से पलायन को मजबूर हैं।
सोमवार दुपहर तक गांव से असलम, उवैस, नूर अहमद, फखरुद्दीन सहित आधा दर्जन लोगों के परिवार सामान समेटकर चले गए। इनमें से कुछ लोग हाथरस तो कुछ अलीगढ़ जाकर बसने की बात कहकर गए हैं। इस संबंध में जब छर्रा कोतवाल जावेद खान से बातचीत की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने के बजाय चुप्पी साध ली।