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महानगर के तालाबों से हटेंगे अवैध कब्जे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अत्यधिक जल दोहन से खाली हुए स्त्रोतों को पुन: भरने के लिए जल संरक्षण अभियान की पहल का व्यापक असर होता नजर आ रहा है। ग्रामीण इलाकों में तालाबों की खुदाई एवं बंध बनाने के काम तेजी से हो रहे हैं। यही नहीं महानगर में भी विलुप्त हुए तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए राजस्व रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने नगर निगम एवं तहसील कोल के अफसरों को राजस्व रिकार्डों में दर्ज सभी तालाब, पोखर एवं जलाशयों के चिन्हांकन के आदेश दिये हैं। आदेश के अनुपालन में विभागीय अफसर पुराने रिकार्डों से माथापच्ची में जुट गए हैं।
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कभी हुआ करते थे 46 तालाब, 34 विलुप्त
अलीगढ़। पर्यावरणविद सुबोध नंदन शर्मा ने बताया कि राजस्व रिकार्डों के मुताबिक अलीगढ़ जिले में करीब 2600 तालाब दर्ज थे। महानगर में ही 46 तालाब थे। लेकिन अतिक्रमणकारियों एवं भूमाफिया की ऐसी नजर लगी कि 34 तालाब विलुप्त हो गए। इन पर बड़ी बड़ी इमारतें बन गई, कालोनियां बस गई और तो और कई सरकारी कार्यालय एवं मेडिकल कालेज तक इन तालाबों को पाटकर बना दिये गए हैं। वर्तमान में मात्र 12 तालाब रह गए हैं। प्रशासन अगर इन्हें ही बचा ले तो मानव जीवन पर बड़ा उपकार होगा।
अंग्रेज अफसरों की पत्नियों की अठखेलियों का गवाह परियों वाला तालाब विलुप्त
अलीगढ़। यूं तो तालाबों के विलुप्त होने की फेहरिस्त लंबी है। लेकिन इनमें मेलरोज बाईपास पर अलीगढ़ का पिकनिक स्पाट माना जाने वाला परियों का तालाब अहम है। इसके नाम के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। बताया जाता है कि अंग्रेजी शासनकाल में ब्रिटिश अफसरों की पत्नियों और बच्चों का यह तालाब पसंदीदा स्थल था। वे इस तालाब को स्वीमिंग पूल की तरह इस्तेमाल करती थी। चारों ओर बाग बगीचे भी थे। उनकी अठखेलियों के चलते इस तालाब का नाम परियों वाला तालाब पड़ गया।
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महानगर के पुराने एवं विलुप्त तालाबों के चिन्हांकन के आदेश तहसील कोल एवं नगर निगम की टीम को दिये गए हैं। इसके बाद इन तालाबों से अतिक्रमण हटवाकर इन्हें गहरा कराया जाएगा।
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चंद्रभूषण सिंह, डीएम
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