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वन विभाग घोटाला: 35 भागों में बांटी चार रेंज, पांच जिलों की टीमें जांच में जुटीं

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पौधरोपण के नाम पर वन विभाग में हुए नौ करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत की जांच में जुटीं टीमों ने अलीगढ़ जनपद के वन क्षेत्र की चारों रेंज को 35 भागों में बांट दिया है। मंगलवार की सुबह टीमें छह बजे से जांच के लिए अलग-अलग रेंजों में जांच करने के लिए पहुंची। इधर, इस जांच में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन विकास अशोक कुमार ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक कैंपा योजना सुनील कुमार के साथ घंटों वन विभाग के कार्यालय में बैठक की।
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जांच टीम के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुनील कुमार दुबे और अशोक कुमार ने अब जांच सिर्फ खैर रेंज में हुए पौधरोपण और गड्ढा खुदान तक ही सीमित नहीं रह गई है। बल्कि अलीगढ़ जनपद की तीन अन्य रेंज अतरौली, इगलास और अलीगढ़ को भी शामिल कर लिया है। बताया जा रहा है कि बनारस, अयोध्या, फैजाबाद, लखनऊ, बरेली, हाथरस के वन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों की पांच टीमों ने यहां 2018-19 में हुए पौधरोपण, पौध खरीद, खाद, जिप्सम खरीद और 2019-20 में हुए गड्ढा खुदान और भरान की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही वन विभाग की पौधशालाओं में उगाई पौध के आंकड़ों का भी कागजों और भौतिक तौर पर मिलान किया जा रहा है। इसके लिए मंगलवार को पांचों जांच टीमों को अलग-अलग रेंजों में भेजा गया। सभी रेंजों को 35 भागों में बांट दिया है, जिससे की जांच कार्य में आसानी हो। इसके बाद खुद सुनील कुमार और अशोक कुमार पौधरोपण की स्थिति जांचने को करीब 2 बजे अलग-अलग रेंजों में गए। इन सभी जांच रिपोर्टों के बाद ही दोनों अधिकारी किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेंगे।
विभाग के एक दरोगा के रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्टर्ड हुई थी फर्म
जांच टीम के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 2018-19 में पौधों को जिस तरु हार्टिकल्चर प्राइवेट लिमिटेड, खैर से खरीदा गया था। वह विभाग के एक दरोगा ने अपने परिजनों के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई थी। इसके बाद उससे पौध खरीदने का खेल हुआ और पैसा आने के बाद फर्म का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया। शिकायतकर्ता की जांच के आधार पर जांच अधिकारियों ने उस वन दरोगा से भी पूछताछ की है। उसकी गर्दन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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कई कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
घपलेबाजी की शिकायत होने के बाद हरकत में आए शासन की जांच को देखकर विभागीय कर्मचारियों के हलक सूख गए हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो इस जांच में विभाग के कई कर्मचारियों की भी गर्दन नपेगी। इसके लिए टीम सभी पर निगाह बनाए हुए हैं। कर्मचारियों से व्यक्तिगत तौर पर पूछताछ की जा रही है। अब विभाग में सब अपनी-अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। मौखिक तौर पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किए जा रहे हैं।
डीएफओ की हालत बिगड़ी, भर्ती
जांच टीम के आने से पहले ही मेडिकल अवकाश पर गए घोटले के मुख्य आरोपी डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार दो दिन से उनकी हालत बिगड़ी हुई है। वह लखनऊ के एक अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं।
दो अधिकारियों की रार ने खोली घोटाले की परतें
वन विभाग में इतने बड़े पैमाने पर हुए घोटाले की शिकायत की पटकथा एकाएक नहीं लिखी गई। इस घोटाले की शिकायत के पीछे दो अधिकारियों की करीब नौ माह पहले हुई आपसी रार वजह बनी। दरअसल, 2018 के अक्तूबर माह में अकराबाद और विजयगढ़ की 559 हेक्टेयर वन ब्लाक की आरक्षित जमीन पर ग्रामीणों द्वारा कब्जा किए जाने का मामला खुला। इस मामले में तत्कालीन खैर रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी अशोक कुमार निमेष को जमीन पर हुए कब्जे का दोषी ठहराकर डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी ने उनके निलंबन की संस्तुति की थी। आरोप लगा था कि अतिक्रमण हटवाने के संबंध में उन्होंने कोई विधिक कार्रवाई नहीं की। आदेश प्राप्त होने के बाद भी एंटी भू-माफिया पोर्टल पर इस अतिक्रमण के संबंध में कोई शिकायत दर्ज कर विधिक कार्रवाई नहीं की। इन सब मामलों के चलते उन्हें लापरवाह करार देते हुए शासन ने निलंबित करके अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक आगरा जोन के यहां संबंधित कर दिया गया। इसके बाद से ही पौधरोपण के नाम पर होने वाले घोटाले की परते खंगाली जाने लगी। शासन से लेकर जिला और जोन स्तर पर शिकायतें श्रीधर त्रिपाठी के खिलाफ दर्ज कराई गईं। विभागीय कर्मचारियों की माने तो दोनों अधिकारियों ने रार के चलते एक-दूसरे की पोल खोली है।
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