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अतिक्रमण की जद में है खैर रोड, दिन में निकलना मुश्किल

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देहली गेट खैर रोड पर ई रिक्शा के कारण लगे जाम में फंसे वाहन व राहगीर। - फोटो : CITY OFFICE
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महानगर का देहली गेट क्षेत्र भी जाम से अछूता नहीं है। देहली गेट चौराहे से लेकर नादा पुल तक करीब चार किमी. के टुकड़े में सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं। पुराने शहर को सीधे प्रमुख बाजार और हाईवे से जोड़ने वाला यह रोड काफी समय से अतिक्रमण की चपेट में है। यहां प्रमुख रूप से पांच चौराहे और तिराहे हैं। जिनमें देहली गेट चौराहा, सब्जी मंडी चौराहा (पशु अस्पताल के पास), शाहजमाल तिराहा, खैर रोड चौराहा, नींवरी मोड और नादा पुल चौराहा शामिल हैं।
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खास बात यह है कि यहां कोई ट्रैफिक लाइट नहीं है। घनी आबादी वाले क्षेत्र में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे पांच से दस फुट तक अतिक्रमण कर रखा है। जिसकी वजह से रोड संकरा हो जाता है। बेतरतीब ई: रिक्शा और टेंपो चालकों ने और ज्यादा हालत खराब कर रखी है। देहली गेट चौराहे पर छह जगहों का जाम आपस में टकराता है। इसमें बारहद्वारी, गूलर रोड, कनवरी गंज, ऊपरकोट, मोहल्ला खटीकान शामिल हैं। दो पहिया, चार पहिया वाहनों सहित बैलगाड़ियां भी जाम का कारण बनी हुई है। यहां सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण है। सामान रख कर सड़क व पटरियों पर अस्थायी अतिक्रमण के अलावा सड़क पर खड़े रहने वाले ठेल, ढकेल के चलते हर वक्त जाम लगा रहता है। रही सही कसर ं बिना परमिट दौड़ने वाले ई-रिक्शा व ऑटो पूरी कर देते हैं।
इस रास्ते से दिन में पैदल निकलना भी दूभर हो रहा है। यहां से आगे बढ़ने पर पशु अस्पताल और सब्जी मंडी चौराहा है। जहां सड़क के दोनों ओर सब्जी, चाट पकौड़ी वालों ने पूरे रोड को अपनी जद में ले रखा है। इससे आगे शाहजमाल तिराहा है। खैर रोड चौराहे पर चार जगहों का जाम आपस में टकराता है। यहां से एक रोड भुजपुरा जाती है, दूसरी नगला मसानी, तीसरी रोड नादा पुल तथा चौथी रोड देहली गेट चौराहा । रोड के दोनों ओर अतिक्रमण है। ई रिक्शा व डग्गेमार वाहनों की भरमार है, इससे आगे नींवरी मोड़ है। यहां रोड तो चौड़ा है, लेकिन सड़क बुरी तरह से टूटी हुई है। इस रोड पर दो चौकी हैं। पहली चौकी जलालपुर की है, दूसरी चौकी रोरावर थाने की है।
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यातायात पुलिस रहती है नदारद
इस इलाके में देहली गेट और रोरावर थाने और तीन दो चौकियां हैं। दोनों थानों के बाहर तो चैक पोस्ट लगी हुई है। देहली गेट के बाद सीधे रोरावर चौकी के बाहर ही चैक पोस्ट है। बीच में तीन किमी के हिस्से में कहीं पर भी यातायात पुलिस मौजूद नहीं है। रोरावर के बाद सीधे नादा पुल पर ही पुलिस चैक पोस्ट है। अगर यहां यातायात पुलिस होती तो शायद जाम की समस्या कम हो जाती।
फुटपाथ पर सजती हैं दुकानें
खैर रोड पर सड़क के अलावा फुटपाथ पर दुकानें सजती हैं। इन दुकानदारों का जितना सामान दुकान के अंदर रहता हैं उससे कहीं अधिक सामान बाहर निकालकर सजा दिया जाता है। जिसके कारण सड़क सकरी हो गई है। ऐसे में बाजार आने वाले ग्राहकों तथा राहगीरों को आवागमन में बेहद परेशानी होती है। इलाका पुलिस व जिम्मेदार अधिकारी जाम की समस्या से पूरी तरह वाकिफ हैं। नगर निगम अधिकारियों ने पिछले सप्ताह इस इलाके में अतिक्रमण हटवाया था, लेकिन अगले दिन हालत फिर से जस के तस हो गए।
खैर रोड पर सुबह से लेकर शाम तक जाम लगा रहता है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं। जिसके कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है। दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। जिसके कारण सड़क संकरी हो जाती है। - पवन कुमार, खैर रोड
ई रिक्शा और टैपों चालक कहीं भी वाहन रोक कर खड़ा हो जाते हैं। यहां ट्रैफिक लाइट भी नहीं है। रोड जर्जर हालत में है। इस रोड पर लोगों की ठेल ढकेल ने अतिक्रमण कर रखा है। - आकाश कुमार, खैर रोड
इस इलाके की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। देहली गेट चौराहे पर बैलगाड़ी वाले भी जाम लगाते हैं। कई तरह की व्यवसायिक गतिविधियां भी यहां संचालित हैं। अतिक्रमण हटा था जो दोबारा हो गया है। - महेश कुमार, खैर रोड
पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था फे ल है। दुकानें सड़क से दस दस फुट बाहर निकली हुई हैं। पूरे रोड पर यातायात पुलिस कर्मी नहीं मिलेंगे। देहली गेट के बाद सीधे नादा पुल पर चैक पोस्ट है। सब्जी, चाट, पकौड़ी वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। - भगत सिंह, देहली गेट
बोले अधिकारी
खैर रोड पर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने पर पूरा फोकस है। ई रिक्शा, टैंपो चालकों को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। डग्गेमार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। जल्द ही इस क्षेत्र की हालत सुधरी हुई मिलेगी।
मुकेश चंद उत्तम, एसपी ट्रैफिक
इस रोड पर सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण है। सड़क में जगह-जगह गड्ढे हैं, जो यातायात को प्रभावित करते हैं। इस इलाके में कोई ट्रैफिक लाइट भी नहीं है। यातायात पुलिस की यहां ड्यूटी लगनी चाहिए। अवैध वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाए।
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अरुण श्रीवास्तव, ट्रैफिक सलाहकार
जाम के मुख्य कारण
एक हजार से अधिक वेंडर ।
1200 से अधिक छोटी बड़ी दुकानें।
15 से अधिक होटल और गेस्ट हाउस।
पांच छोटे बड़े स्कूल
सात प्रमुख बैंकों की शाखाएं।
12 अस्पताल जहां लोगों का अधिक आवागमन रहता है।
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