बिजली की बढ़ी दरों से परेशान उपभोक्ता को विभाग ने एक और झटका दिया है। एक महीने पहले नए शासनादेश के मुताबिक बिजली विभाग अपने उपभोक्ताओं से बिजली के बिल की 45 दिन की अग्रिम सिक्योरिटी धनराशि वसूल रहा है। पहले से ही बिजली की बढ़ी दरों से परेशान उपभोक्ता विभाग के इस कदम से आक्रोश से भर गया है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक दलों और संगठनों ने विभाग के इस कदम की आलोचना करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। जबकि विभाग के अधिकारी इसे शासन स्तर से आए निर्देशों का हवाला देते हुए अपनी विवशता जाहिर कर रहे हैं।
पुरातन छात्र समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदीप के गुप्त कहते हैं कि उपभोक्ता ने जब भी अपने घर के लिए बिजली कनेक्शन लिया होगा तब सिक्योरिटी जमा की। उस वक्त विभाग ने जितनी सिक्योरिटी मांगी, उतनी ही जमा की गई। लेकिन अब नए हिसाब से नया सिक्योरिटी रेट निकाल दिया है। नए रेट के हिसाब से जो सिक्योरिटी बन रही है और जो उपभोक्ता ने पहले से जमा कर रखी है, उसमें से घटाकर बाकी पैसा जमा करने को कहा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि यदि हमने सरकारी खजाने में उस समय के हिसाब से जो भी पैसा जमा कर रखा है वह आज के हिसाब से लिया जाने लगेगा। जो उपभोक्ता लगातार बिल जमा कर रहा है, पुराना कनेक्शन चला रहा है। उससे सिक्योरिटी की मांग बेहद अनुचित है।
इस तरह कर रहे हैं धनराशि का निर्धारण
- उपभोक्ता का पूरे वर्ष का बिल का पैसा जोड़ दे रहे हैं। उसमें एक महीने का औसत बिल बना रहे हैं। उसके आधार पर 45 दिन के बिल का निर्धारण कर ले रहे हैं।
यह है अनियमितता का आरोप
- कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि जैसे गर्मियों में बिजली की खपत अधिक हो जाती है। सर्दियों में कम रहती है। विभाग के लोग सबसे अधिक खपत वाले महीने के आधार पर 12 महीने का बिल जोड़ रहे हैं। उसके आधार पर 45 दिन की बिलिंग कर सिक्योरिटी जमा करने का नोटिस दे रहे हैं।
सड़कों पर उतरने से लेकर अदालत तक का ऐलान
कांग्रेस के पूर्व महानगर महासचिव आगा युनूस खान ने कहा है कि जनता पहले ही बिजली की महंगी दरों से परेशान है। इस पर सिक्योरिटी के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। यह बिजली उपभोक्ताओं में दहशत है। यह बिजली विभाग की मोनोपोली (एकाधिकार) है। अगर कोई दूसरी संस्था बिजली दे सकती तो सारा एकाधिकार टूट जाता। अगर यह व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो सड़कों पर उतर कर विरोध किया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विनोद पांडेय, लाखन सिंह चौहान, आनंद पाल सिंह, हेमंत शर्मा टोटो आदि ने कहा है कि 15 दिन में बिजली विभाग ने लोगों का उत्पीड़न बंद नहीं किया और यह नोटिस वापस नहीं लिए तो लाल डिग्गी स्थित कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। नागरिक चेतना समिति के विधिक सलाहकार रामकृष्ण तिवारी एडवोकेट, अशोक शर्मा आदि ने इस सिक्योरिटी राशि को कानूनी चुनौती देने की घोषणा की है।
‘लखनऊ से 45 दिन की सिक्योरिटी राशि जमा करवाए जाने के निर्देश हैं। पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था लागू है। विभाग उपभोक्ता को इस राशि पर ब्याज भी दे रहा है। इसका मकसद बिल जमा नहीं होने की स्थिति में सिक्योरिटी राशि से विभाग का पैसा वसूल कर लिया जाना है। अगर किसी उपभोक्ता को कोई परेशानी है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है’
- एसवी पाल, अधीक्षण अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड
कुछ दिन बाद स्मार्ट मीटर बन सकता है नई फांस
बिजली विभाग सिर्फ बिजली की दरों और सिक्योरिटी जमा करने के लिए नोटिस देकर ही उपभोक्ताओं का उत्पीड़न नहीं कर रहा है। बल्कि अब कुछ दिनों बाद स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ता को नई व्यवस्था दी जाने की तैयारी हो रही है। हालांकि विभाग का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ता से कुछ पैसा नहीं लिया जाएगा। लेकिन अधिकारियों का यह दावा कितना सही साबित होता है, यह उस वक्त पता लगेगी जब यह स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू होगा।
कहा जा रहा है कि इन स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ता अपने बिल की स्थिति स्वयं जान सकेगा। साथ ही उसे आन लाइन जमा भी कर सकेगा। कितनी यूनिटों का उपभोग हुआ है यह एप के माध्यम से निगरानी कर सकेगा। दूसरी ओर विभाग के अधिकारी भी एक साफ्टवेयर के माध्यम से उपभोक्ता के उपभोग की स्थिति पर नजर रख सकेंगे।