सारथी-4 साफ्टवेयर की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आए तथ्य देख कर अफसर भी भौचक हैं कि आखिर आरटीओ में नियम कानून की किस किस तरह से धज्जियां उड़ाई गईं।
वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2000 के बीच बने ड्राइविंग लाइसेंस की मियाद में बड़ा गड़बड़झाला किया गया है। जांच में सामने आए कुछ लाइसेंस निर्धारित 20 वर्ष की अवधि के न हो कर 25, 30, 35 और 40 वर्ष की अवधि तके लिए जारी कर दिए गए। ये सभी नियम विरुद्ध ढंग से जारी किए गए। जिसमें लाइसेंस अवधि हाथ से लिखी गई है। उस वक्त डिजीटल लाइसेंस नहीं बनता था, इसलिए ये मनमानी होती रही। जब सारथी साफ्टवेयर में लाइसेंस की फीडिंग का काम शुरू हुआ तो ये हकीकत देख कर अधिकारी परेशान हो गए। अब पूरे मामले में पूर्व में तैनात अधिकारियों और बाबुओं को बचाने के लिए कवायद तेज हो गई है। नये सिरे से ऐसे लोगों को लाइसेंस रिन्यू कराने को कहा जा रहा है।
नियम के अनुसार किसी भी व्यक्ति का लाइसेंस 20 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होता है। अगर किसी व्यक्ति की उम्र 30 वर्ष से अधिक होती है तो उसे 50वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ लाइसेंस रिन्यू करना होता है। आरटीओ प्रशासन केडी सिंह ने बताया कि मनमानी मियाद वाले लाइसेंस धारकों को सूचना दी जा रही है और उनके लाइसेंस रिन्यु कराए जा रहे हैं। अगर उन्होंने रिन्यू नहीं कराया तो लाइसेंस निरस्त माना जाएगा। ऐसे में चेकिंग में पकड़े जाने पर वह लाइसेंस रहित ड्राइवर माने जाएंगे और उसी के अनुसार उनका चालान होगा।