डीएम, एसएसपी और साथ खड़ीं शिक्षिका रश्मि।
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‘पानी पी, खाना खा, चांद देखकर घर चल’ यह वाक्य लिखा था कस्बा छर्रा के मोहल्ला सोनाराम स्थित जर्जर भवन में संचालित प्राथमिक कन्या पाठशाला हाईस्कूल की सातवीं कक्षा के ब्लैक बोर्ड पर। इसके पहले शब्द ‘पानी’ के नीचे एक तीर बना हुआ और नीचे लिखा था ‘पानीपत’ का युद्ध 1526, ‘खाना’ के नीचे एक तीर बना हुआ और नीचे लिखा हुआ था ‘खानवा’ का युद्ध 1527, ‘चांद’ के नीचे एक तीर बना हुआ और नीचे लिखा था ‘चंदेरी’ का युद्ध 1528, अंत में ‘घर’ के नीचे तीर बना हुआ था और नीचे लिखा था ‘घाघरा’ का युद्ध 1529 ।
एसएसपी राजेश पांडेय ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि मैं निकाय चुनाव की तैयारियों के क्रम में जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद संग मंगलवार को इस मतदान केंद्र का निरीक्षण करने गया था। इसी दौरान ब्लैक बोर्ड पर यह लिखा देखा तो कौतूहलवश मैं कक्षा के भीतर प्रवेश कर गया।
दरअसल इतिहास की इन तिथियों को याद करने के लिए नेमोनिक्स के सहारे अध्यापिका कु. रश्मि अपनी छात्राओं को कभी न भूलने वाला फार्मूला बता रही थीं। नेमोनिक्स का हिंदी शब्द कोष में अर्थ याददाश्त बढ़ाने वाले शास्त्र, स्मृति सहायक, स्मरक उल्लिखित है। मैंने अध्यापिका से पूछा तिथियों को याद करने के लिए यह वाक्य आपको कहां से मिला।
इस पर रश्मि ने बताया कि यह उन्होंने खुद बनाया है। इससे बच्चों को इतिहास की तिथियां याद करने में कोई कठिनाई नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इन बच्चों को इतिहास की सभी तिथियां सही-सही याद हैं, जो मैने इसी तरह छोट-छोटे स्थानीय वाक्य बनाकर उन्हें याद कराई हैं ।
अध्यापिका का अपनी छात्राओं के बारे में ऐसा भाव, सेवा के प्रति उनका समर्पण, अध्यापन की विधा में उनका शोध और अति सीमित संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में बच्चों के भविष्य के बारे में उनकी चिंता देखकर मैं आह्लादित हुआ। कक्षा सात में इतिहास पढ़ाने वाली इस अध्यापिका का समर्पण देख कर यही लगा कि ऐसे ही बिरले शिक्षक-शिक्षकाओं के कारण आज भी यह शिक्षा व्यवस्था चल रही है ।
शिक्षिका द्वारा पाठ याद रखने के लिए दिए गए यह छोटे-छोटे फार्मूले छात्राओं को केवल इतिहास की तिथि याद करने में ही मदद नहीं कर रहे होंगे, बल्कि मेधावी एवं कुशाग्र छात्राएं अन्य विषयों के कठिन फार्मूलों को याद करने को उपयोगी होंगे।