अलीगढ़ के वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने खरगोश के हर्निया की दुर्लभ सर्जरी की, जिससे खरगोश की जान बच गई। पशु मालिक ने कहा कि डॉ साहब ने हमारे खरगोश को नया जीवन दान दिया है। यह हमारे लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।
हर्निया के ऑपरेशन का नाम सुनते ही मन में घबराहट हो जाती है। इंसानों में हर्निया की सर्जरी कहीं न कहीं सुनने को मिल ही जाती है। हर्निया का ऑपरेशन जानवरों में बहुत ही कम सुनने को मिलता है। ज़्यादा हैरानी तब होती है, जब इस तरह की समस्या से एक छोटा सा जानवर जूझ रहा हो।
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अलीगढ़ में यह समस्या एक नर खरगोश में देखने को मिली, जिसे अंडकोषीय हर्निया (Scortal Hernia) था। सर्वेश द्विवेदी ने अपने घर में एक खरगोश पाला हुआ है। कुछ दिनों पहले देखा गया कि खरगोश के एक अंडकोष का आकार सामान्य से काफी बड़ा हो गया था। जिससे उसे चलने में काफी दिक्कत होती थी। यह देखकर खरगोश को पालने वाले घबरा गए। उन्होंने शहर में कई जगह खरगोश को दिखाया, पर कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई।
खरगोश को शहर के वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ. विराम वार्ष्णेय के क्लीनिक पर ले जाया गया। डॉ. विराम वार्ष्णेय ने उसका परीक्षण किया। खरगोश को अंडकोषीय हर्निया बीमारी बताई गई। बीमारी को शल्य चिकित्सा करके ही दूर किया जा सकता था। पहले तो पशु मालिक घबरा गए और मन में कई तरह के नकारात्मक विचार आने लगे।
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खरगोश को डॉ. विराम वार्ष्णेय की क्लीनिक पर सर्जरी के लिए ले जाया गया। डॉ. विराम ने पूरी सर्जरी जनरल अनेस्थेसिया में की। डॉ. विराम वार्ष्णेय ने बताया कि पेशाब की थैली का वृषणकोश (scrotum) में हर्नियेशन हो गया था, जिससे अंडकोष (testes) भारी हो गए थे।
दो घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद ख़रगोश पूर्ण रूप से सही हो गया था। पंद्रह दिन बाद उसके ऊपरी टांके काट दिए गए थे। पशु मालिक सर्वेश द्विवेदी ने कहा कि हमें खरगोश के बचने की उम्मीद कम थी, लेकिन डॉ. साहब ने हमारे खरगोश को नया जीवन दान दिया है। यह हमारे लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।