प्रो. शाह आलम।
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एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में जिन विद्यार्थियों के अंक इच्छानुसार नहीं आए हैं, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। भविष्य में उन्हें और मौके मिलेंगे। अंक सिर्फ एक संख्या है।
प्रो. शाह आलम ने कहा कि परीक्षाओं में अंक जरूरी हैं, लेकिन इतने भी नहीं जरूरी हैं, जिसके लिए विद्यार्थी तनाव में आ जाएं। 60, 70 या 80 फीसदी अंक मिलने का मतलब है कि उनमें आगे बढ़ने की खूबियां हैं। अंक किसी की काबिलियत पूरी तरह से दर्शा नहीं सकता है, क्योंकि हो सकता है, जब परीक्षा दे रहा हो, तो वह नर्वस हो गया हो, उसकी तबीयत ठीक नहीं रही हो।
आज के समय में सिर्फ अंकों से ही सफलता तय नहीं होती है, जितनी भी प्रतियोगी परीक्षाएं होती हैं, उनमें ज्ञान की परख होती है। कौशल, आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता कहीं ज्यादा अहम होती है। कई बार कम अंक पाने वाले विद्यार्थी आगे चलकर बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि “सितारों से आगे जहां और भी हैं”।