महानगर में मलखान सिंह जिला अस्पताल, दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में एक दिन में 275 लोग कुत्तों के काटने के शिकार होकर वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इन दोनों अस्पतालों में माह में करीब सात हजार लोग पहुंचते हैं। यह आंकड़ा तो इन दो अस्पतालों का है। निजी चिकित्सकों से वैक्सीन लगवाने वालों का आंकड़ा अलग है।
यह हैं आंकड़े
60,000 कुत्ते हैं नगर निगम के अनुमान के अनुसार महानगर में
918 रुपये का भुगतान एक कुत्ते की नसबंदी के लिए दिया जा रहा
70 से 80 कुत्ते ही एक बार में रखे जाते हैं धोर्रा माफी सेंटर पर
7200 कुत्तों की एक साल में की गईं नसबंदी, चार दिन होती है देखभाल
कान काटकर बनाया जाता है पहचान का निशान
पशुचिकित्सा अधिकारी के अनुसार जिन कुत्तों की नसबंदी की जाती है, उनकी पहचान के लिए कान को काटा जाता है। इलेक्ट्रोकोटिंग मशीन के कान पर वी शेप में कट लगाया जाता है। इससे उनकी पहचान होती है, कि इनकी सर्जरी हो चुकी है। इन कुत्तों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन भी लगाया जाता है।
शहर में कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम लगातार प्रयास कर रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत न होने की वजह से यह काम अभी धीमी गति से चल रहा है। जल्द ही अभियान गति पकड़ेगा। - अमित आसेरी, नगर आयुक्त
एक समय पर सिर्फ 70 से 80 कुत्तों को ही सेंटर में रखा जाता है। एक ही संस्था होने की वजह से अभियान की गति धीमी है। नवंबर तक नया सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद और नई संस्थाओं को भी ठेका दिया जाएगा। - डा. राजेश वर्मा, पशुचिकित्सा अधिकारी