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महामारी के मुश्किल दौर में विदेश से पढ़े डॉक्टर्स भी आ सकते हैं देश के काम

Fri, 30 Apr 2021 10:29 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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डॉक्टर्स - फोटो : amar ujala
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135 करोड़ देशवासियों को वैक्सीनशन और स्वास्थ्य सुविधाएं देने में देश के सामने डॉक्टर्स, सहायक चिकित्सा कर्मियों और नर्सेज की भारी कमी है।

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सरकार से लेकर सिस्टम तक लगातार कोरोना के इस आपदा काल में डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे हैं। अच्छी बात ये है कि देश मे इस वक्त 30,000 से ज्यादा फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स हैं जो देश की सेवा करना चाहते हैं और आपदा की इस घड़ी में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण भारत मे किसी भी नागरिक की जान न जाए इसे सुनिश्चित करना चाहते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक इस समय देश में 25,000 युवा डॉक्टर्स हैं जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। 1.3 लाख डॉक्टर्स हैं जो नीट पीजी की तैयारी कर रहे हैं। 30,000 से ज्यादा फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स हैं जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर एंट्रेन्स एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं और 2.2 लाख से ज्यादा नर्सेज हैं जो योग्य हैं और देश की सेवा कर सकते हैं। ये सभी नर्सेज फाइनल एक्जाम नहीं दे पाने के कारण देश सेवा नहीं कर पा रहे हैं।
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दरअसल ये बहस तेज हुई है 23 अप्रैल 2021 को जारी नेशनल मेडिकल कमीशन की एक ड्रॉफ्ट को लेकर, जिस ड्रॉफ्ट में कहा गया है कि विदेश से मेडिकल की शिक्षा लेकर आने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स देश में तभी प्रैक्टिस या स्वास्थ्य सेवा दे सकते हैं जब वे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट इग्जाम (एफएमजीई) पास कर लें।

हालांकि देशभर के बुद्धिजीवी इस विषय पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। इसी कड़ी में रूस एजुकेशन के वाइस चेयरमैन और सेवानिवृत्त एयर मार्शल डॉक्टर पवन कपूर का कहना है कि देश में फिलहाल सवास्थ्य सेवाओं की जरूरत है जिसे देखते हुए डॉक्टर्स, नर्सेज और सहायक सवास्थ्य कर्मियों को मौका देना चाहिए।

पूर्व एयर मार्शल डॉ. पवन कपूर ने कहा कि इंजेक्शन, दवाई, स्वास्थ्य उपकरण और हॉस्पिटल बेड समेत अस्पतालों की संख्या तो बढ़ाई जा सकती है जिसको लेकर सरकार गंभीर भी है लेकिन जरूरत के हिसाब से डॉक्टर्स की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा लिहाजा सरकार को चाहिए कि फिलहाल फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स और नर्सेज की सेवाएं ली जाएं ताकि देशवासियों की जान बचाई जा सके।
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हालांकि सरकार और सिस्टम इस वक्त सबसे ज्यादा पब्लिक हेल्थ केयर पर फोकस कर रही है और ये सुनिश्चित कर रही है कि कैसे देश में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए मेडिकल क्षेत्र के सभी दक्ष लोगों की सेवाएं ली जाए और प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य लाभ दी जा सके।
 

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