बेटों को बना रहा डॉक्टर-इंजीनियर
अपराध की दुनिया में आने के बाद उसने अपने परिवार को कानून से बचाने के लिए पत्नी को तलाक दे दिया। मगर पत्नी के साथ रह रहे अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई। इस समय उसका बड़ा बेटा पुणे के एक बड़े संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है जबकि छोटा बेटा भी महाराष्ट्र के ही किसी संस्थान से इंजीनियरिंग कर रहा है।
2020 में गांव आया था डॉक्टर डेथ
डा. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ के राजस्थान से पकड़े जाने के बाद जब गांव पहुंचकर ग्रामीणों व परिवार के लोगों से बातचीत की गई तो वे खुलकर तो ज्यादा कुछ नहीं बोले। बस इतना ही बताया कि आखिरी बार 2020 में फरवरी माह में वह कोविड के समय में गांव आया था। आधा घंटा यहां रुका था। तब उसने बताया था कि पेरोल पर छूटकर आया है। उस समय उसने 20 दिन छर्रा थाने में हाजिरी भी लगाई थी। इस बीच जब ग्रामीणों ने उसकी पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों के विषय में पूछा तो बताया कि एक भाई उत्तराखंड में रहता है, जबकि एक भाई सीआईएसएफ में कार्यरत है। वहीं पत्नी के विषय में बताया कि उसकी शादी बीएएमएस शिक्षित होने के चलते कासगंज के एक रेलवे अफसर की बेटी से हुई थी। उसके दो बेटे भी हैं।
कानून से बचने को तलाक लेना स्वीकारा
ग्रामीणों व खानदान के सदस्यों ने दबी जुबां से यह बात स्वीकारी कि जब वह कोविड के समय में गांव आया था। तब उसने बातचीत में ये बात स्वीकारी थी कि पत्नी से कानूनी तरीके से लिखा पढ़ी में तलाक ले लिया है। ताकि उसे पुलिस परेशान न करे। दोनों बेटे उसी के पास रहते हैं। मगर यह बात नहीं बताई कि दोनों कहां रहते हैं। हां, महाराष्ट्र में कहीं उनके होने की चर्चाएं जरूर होती रहीं हैं। मगर इसकी कोई पुष्टि नहीं। बेटों के विषय में इतना जरूर बताया था कि बड़ा बेटा एमबीबीएस कर रहा है और बड़ा डॉक्टर बनेगा। पत्नी बच्चों को पूरा खर्चा भेजता हूं। बेटों की पढ़ाई का खर्च भी संभाल रहा हूं। इसी से उसके शातिराना अंदाज का पता लगाया जा सकता है।
हरियाणा में पत्नी से मुलाकात के मिले थे सुराग
वर्ष 2014 में जब छर्रा के कारोबारी मयंक गोयल से फोन पर रंगदारी मांगी गई, तब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से गुरुग्राम के न्यायालय के पास के एक पीसीओ का नंबर चिह्नित किया था। वहां जब पुलिस जांच को पहुंची तो भोंड़सी जेल से पेशी पर आने के बीच में देवेंद्र द्वारा फोन करना उजागर हुआ था। साथ में यह भी मालूम चला था कि उसकी पत्नी यहां उससे मिलने आया करती थी। साथ में उसके लिए खाना भी बनाकर लाती थी।
ग्रामीणों से कहा था...जितना हो सके दूसरों का भला करो
ग्रामीण बताते हैं कि जब वह कोविड के समय में कार लेकर आया तो काफी देर बातचीत में उसने धर्म-कर्म की बातें कहीं। कहा था कि सांसारिक जीवन में पाप के कर्मों का फल मिलता है। इसलिए जितना हो सके दूसरों का भला करें। भूखे को भोजन खिलाने में जो आनंद है वह दूसरा कहीं नहीं। उस समय उसकी बातों को देख सुनकर कभी नहीं लगा था कि वह इतना बड़ा अपराधी भी हो सकता है। हालांकि, वह अपने हिस्से की जमीन बेचने के इरादे से आया था, उस समय अतरौली तहसील में गांव के ही नरेंद्र और रघुराज की गवाही से भटौला सिकंदरपुर के दो सगे भाइयों को जमीन का बैनामा किया था।