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डीएम साहब, एआरटीओ प्रशासन ने आपसे सरासर झूठ बोला

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संभागीय परिवहन विभाग भ्रष्टाचार के साथ ही जिलाधिकारी तक को गुमराह करने का काम कर रहा है। एक आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत को लेकर एआरटीओ प्रशासन की ओर से दिए लिखित जवाब में इसका खुलासा हुआ है। जवाब में एआरटीओ ने बीते सप्ताह में डीएम को एक बार नहीं, दो बार लिखित तौर पर कहा है कि उनके कार्यालय में कोई भी बाहरी व्यक्ति काम नहीं कर रहा। इनमें से एक जवाब 27 अक्तूबर को भेजा गया, जबकि 24 घंटे बाद ही 28 अक्तूबर को एआरटीओ कार्यालय में ली गई तस्वीर के साथ 29 अक्तूबर के अंक में ‘अमर उजाला’ ने बाहरी व्यक्ति के कंप्यूटर सीट पर बैठकर काम करने की खबर प्रकाशित की थी।
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आरटीआई कार्यकर्ता केशव देव ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में दलालों के बाबुओं के कक्ष में कंप्यूटर पर बैठकर काम करने संबंधी व बिना रिश्वत लिए किसी भी आवेदक का काम न करने की शिकायत आईजीआरएस के माध्यम से शासन को 14 अक्तूबर को मय फोटो व वीडियो के साथ की थी। शासन ने जिला प्रशासन से और जिला प्रशासन ने एआरटीओ से जवाब तलब किया। 21 अक्तूबर को परिवहन विभाग ने सारे आरोप नकारते हुए किसी भी बाहरी के काम न करने और पैसों का कोई लेनदेन न होने की बात लिखकर जवाब भेजा दिया। जवाब से संतुष्ट न होने पर पुन: 22 अक्तूबर को शिकायत की। इसका 27 अक्तूबर को फिर से एआरटीओ की ओर से उसी प्रकार का जवाब भेजा गया। 29 अक्तूबर को अमर उजाला में जब एआरटीओ प्रशासन के कक्ष में उनकी मौजूदगी में ही कंप्यूटर सीट पर बैठकर काम कर रहे दलाल की खबर छपी। इससे साफ है कि एआरटीओ ने डीएम को भेजे लिखित जवाब में सरासर झूठ बोला। इस मामले में कार्रवाई के लिए वह फिर से शासन में शिकायत करेंगे। अमर उजाला में छपी खबर से उनमें फिर से साहस जागा है।
-आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत के संबंध में एआरटीओ की ओर से भेजा गए जवाब व वास्तविक सच्चाई का पता लगाने सहित कार्यालय में बरती जा रहीं अनियमितताओं को लेकर जांच कराई जाएगी। - चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी।
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