शहर की घनी आबादी में स्थापित करीब 800 निकिल पॉलिश प्लांटों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट होने का इंतजार हैं। 15 साल पहले इनको शिफ्ट करने के लिए सर्वे हुआ था, लेकिन उसकी रिपोर्ट को जिला उद्योग केंद्र की फाइलों में ही दबा दिया गया। उद्यमियों के अनुरोध पर हर साल इनके लिए जमीन तलाशी जाती है। जमीन मिल भी जाती है लेकिन उस जमीन को बड़े उद्योगों की स्थापना के लिए प्रस्तावित कर दिया जाता है, जिसकी वजह से यहां के यह उद्यमी घनी आबादी में ही ढलाई से लेकर वेल्डिंग, रिताई, लैंसर, कटाई, पॉलिश तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग का काम करने के लिए मजबूर हैं।
खतरनाक केमिकल इस्तेमाल होने वाले इन उद्योगों से पुराने शहर के करीब दो लाख लोग प्रभावित हैं। अन्य इलाकों की तुलना में यहां पर रहने वाले लोग सांस, दमा, खांसी, टीबी सहित कई खतरनाक बीमारियों से ज्यादा ग्रसित रहते हैं। इन उद्योग से जुड़े छोटे उद्यमियों का कहना है कि उनकी ओर प्रदेश सरकार का कोई ध्यान नहीं है, जबकि चार औद्योगिक आस्थान स्थापित कर बड़े उद्योगों को स्थापित करा दिया है। एक और औद्योगिक आस्थान ख्यामई में बनाने के लिए जमीन खरीदने की तैयारी की जा रही हैं।
नीचे फैक्टरी, ऊपर आवास
करीब एक लाख की आबादी वाले भुजपुरा में इन उद्योगों को घरों से संचालित किया जा रहा है। वहां नीचे निकिल पॉलिश का काम होता है और ऊपर उनका परिवार रहते हैं। ऐसे में इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायन और उनसे निकलने वाली गैस से परिवार के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। भुजपुरा के अलावा गूलर रोड, नौरंगाबाद. ऊपरकोट, जयगंज, बराई, ब्रह्मनपुरी, तमोली पाड़ा में भी यही स्थिति है।
इस तरह करते हैं काम
घनी आबादी में पीतल के स्क्रेप को अधिक तापमान वाली कोयले की भट्ठियों में गलाकर सिल्ली बनाई जाती है। इसके बाद उसकी मूर्ति, हेंडिल आदि के सांचों में ढलाई होती है, जिसे बाद में वेल्डिंग, रिताई, लैंसर, कटाई, पॉलिश, तेजाब से सफाई और उसके बाद इलेक्ट्रोप्लेटिंग करके चमकदार तथा आकर्षक बनाया जाता है। पूरी प्रक्रिया में ब्राइटनर, पोटाश, पोटेशियम, तेजाब आदि का इस्तेमाल होता है। जिसमें से गैस भी निकलती है और इसके गंदे पानी को नालियों में बहा दिया जाता है। इस काम में लगे छोटे उद्यमियों का सुझाव है कि उनके लिए किसी स्थान पर सस्ती दरों पर जमीन मुहैया कराई जाए। साथ में अनुदान भी मिले ताकि इस उद्योग में लगे छोटे उद्यमियों पर विपरीत असर न हो।
-ढलाई से लेकर निकिल पॉलिस तथा इलेक्टोप्लेटिंग का काम करने वाले छोटे उद्योगों के लिए सरकार को औद्योगिक आस्थान में उपयुक्त स्थान देना चाहिए, ताकि इन उद्योगों के लिए एक ही स्थान पर काम हो सके। - नीरज अग्रवाल, हार्डवेयर कारोबारी।
-प्रदेश सरकार मध्यम और बड़े उद्योगों की ओर ध्यान दे रही है। लेकिन छोटे और असंगठित क्षेत्र वाले इस तरह के उद्योगों के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं हो रहा है। जबकि आर्थिक तंगी से जूझ कर घरों में काम करने वाले इन कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन देना चाहिए। -अंकित गोयल, हार्डवेयर कारोबारी।
नागरिकों की अपील
-सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इन उद्योगों को घनी आबादी वाले इलाके से हटाकर दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जाए। जिससे कि आम आदमी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके। -प्रांजुल गर्ग, सासनीगेट
-भुजपुरा सहित कई इस तरह के इलाकों में काम करने वाले छोटे उद्यमी और उनमें काम करने वाले कारीगरों के परिवार के लिए प्रशासन और श्रम विभाग को पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। -राजेश कुमार, मामू भांजा
-करीब 15 साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी भुवनेश कुमार के कार्यकाल में इस उद्योग को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कराने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला उद्योग केंद्र की संयुक्त टीम ने सर्वे किया था। लेकिन उस रिपोर्ट को लागू किया जाना है। -जेपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
- इन उद्योगों को सुरक्षित स्थान पर स्थापित करने के लिए सरकार की योजना है। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है कि अब कितने उद्योग हैं और उनको शिफ्ट करने के लिए किस तरह योजना तैयार की जाए। -श्रीनाथ पासवान, संयुक्त आयुक्त जिला उद्योग केंद्र।
खतरनाक हैं ये केमिकल
निकिल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की वजह से सांस, टीबी के रोग की संभावना रहती है। किडनी तथा फे फड़े में भी इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। -डॉ. संजय भार्गव।