महत्वपूर्ण कागज गायब होने के बारे में बताते हुए महीपाल शर्मा।
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तहसील से कलेक्ट्रेट तक के रिकार्ड रूम में जमीनों के दस्तावेज गायब होना कोई नई बात नहीं है। अतरौली के जमीन प्रकरण के सामने आने के बाद बाबुओं की मनमानी एक बार फिर पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। कलेक्ट्रेट रिकार्ड रूम में अतरौली प्रकरण से पहले भी कई बेशकीमती जमीनों के बंदोबस्त और खतौनी के साथ छेड़छाड़ की गई है।
हरियाणा सीमा से लगे अलीगढ़ के टप्पल ब्लाक के गांव ऊंटासानी, खादर और आराजी कटरी की विवादित जमीन (बंदोबस्त संख्या 1347) के दस्तावेजों में गड़बड़ी करते हुए खतौनी के 11 पेज ही फाड़ दिए गए हैं। यही काम मिथलेश्वर महादेव मंदिर रामघाट रोड की जमीन में किया गया।
कलक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले अधिवक्ता चंद्रहास मिश्रा ने बताया कि उनके पिता महीपाल शर्मा लंबे समय से अधिवक्ता के मुंशी के तौर पर काम कर रहे हैं। पिता द्वारा कलेक्ट्रेट के रिकार्ड रूम से जमीनों की खसरा, खतौनी और बंदोबस्त की छेड़ख़ानी के संबंध में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। एक आरआरके और एक एआरके ने मिलकर यहां कई बेशकीमती जमीनों के दस्तावेज गायब किए
जिनमें हरियाणा बार्डर के गांव ऊंटासानी और खादर और आराजी कटरी की विवादित जमीन (बंदोबस्त संख्या 1347) की खतौनी संख्या 1356 से 1358 तक के 11 पेज फाड़ दिए गए। मामला इतना आगे बढ़ा कि इसमें अब तक चार लोगों की कथित तौर पर हत्या तक हो चुकी है।
हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा है। इसी प्रकार से मिथिलेश्वर महादेव मंदिर, रामघाट रोड की जमीन के दस्तावेजों के साथ भी छेड़छाड़ कर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया। शिकायत करने के बाद अधिकारी मामले को पुराना बताकर सबकुछ रफादफा करा देते हैं।