शहर की जमीन में लगातार उतर रहे इंडस्ट्रियल वेस्ट, हवा में घुल रहे जहर, गंदगी, कूड़ा आदि के चलते शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली आदि त्वचा की बीमारियां बढ़ गई हैं। केवल मलखान जिला अस्पताल में ही इससे पीड़ित 1000 मरीज रोजाना आ रहे हैं। दीन दयाल अस्पताल, निजी क्लीनिक और अर्बन हेल्थ सेंटरों के आंकड़े को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो यह संख्या प्रतिदिन तीन हजार मरीजों से अधिक की बैठती है। जिला अस्पताल के डाक्टर इसे शहर के जन स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।
मलखान सिंह जिला अस्पताल की आयुष विंग में कार्यरत डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि उनके यहां पर जो मरीज आ रहे हैं उनमें त्वचा में लाल दाने होना, लगातार खुजली होना, कहीं-कहीं त्वचा का रंग बदलने, त्वचा का दागदार हो जाने आदि के मामले आ रहे हैं। प्रतिदिन इनकी संख्या प्रतिदिन एक हजार के आसपास रहती है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि हमारे पास जो मामले आ रहे हैं उनमें अधिकांश उन बस्तियों से होते हैं जहां पर साफ सफाई का अभाव रहता है। ऐसे लोग अपनी निजी साफ सफाई पर भी कम ध्यान देते हैं। ये लोग नहाने और हाथ धोने के लिए जो पानी इस्तेमाल करते हैं, वह साफ नहीं होता है। धारणा है कि नहाने आदि के काम के लिए अगर पानी साफ न हो तो कोई बात नहीं है। जबकि यह गलत है। नहाते समय भी साफ पानी का ही प्रयोग होना चाहिए।
कुछ अन्य कारण
भूजल लगातार जहरीला हो रहा है। पानी में टीडीएस (कठोरता) और टाक्सिक बढ़े हैं। यह बात आरओ प्लांट लगाने वाले निजी दुकानदार भी स्वीकार करते हैं।
वातावरण की हवा में भी कार्बन मोनो आक्साइड और सल्फर आदि की मात्रा लगातार बढ़ रही है। जिससे त्वचा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
इसके अलावा जो सब्जियां और खाद्य पदार्थ आदि प्रयोग किए जा रहे हैं उनमें भी हानिकारक केमिकल इस्तेमाल हो रहे हैं।