अंडला में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर की जमीन के अधिग्रहण से पहले मुआवजे को लेकर किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। जिला प्रशासन सर्किल रेट से दोगुना मुआवजा देने की बात कह रहा है तो वहीं, किसान चार गुना मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग पर अड़ गए हैं। यहां सोमवार को एक बड़ी पंचायत करने की तैयारी चल रही है। इस पंचायत में आसपास के गांवों के किसान जुटेंगे। यहां के किसान पीएम मोदी के वादे की भी याद दिला रहे हैं, जिसमें उन्होंने चार गुना मुआवजे और एक सरकारी नौकरी देने की बात कही थी।
शनिवार को गांव का तीन चोटी वाला मंदिर किसानों की आगामी रणनीति का अड्डा बना रहा। यहां पर लगभग 24-25 लोग जुटे रहे। मौके पर भारतीय किसान यूनियन हरपाल गुट और भानु गुट के लोग भी पहुंच गए। हरपाल खुद किसान यूनियन जिंदाबाद का नारा लगाते रहे। वहीं, शुक्रवार को टल गई किसान पंचायत अब सोमवार को करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लेकिन पुलिस प्रशासन शांति बनाए रखने के लिए चौतरफा दबाव बनाए है।
दस साल पहले जमीन अधिग्रहण को लेकर हुआ था विवाद
ठीक दस साल पहले इसी हाईवे पर टप्पल के पास जेपी टाउनशिप बसाने के लिए प्रशासन और किसानों के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर एतिहासिक विवाद हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त भी किसान नोएडा के बराबर मुआवजा देने की मांग पर अड़े थे और प्रशासन अलीगढ़ के अलग रेट दे रहा था। ठीक दस वर्ष बाद टप्पल से पहले अंडला पर फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है। प्रशासन दोगुना मुआवजा दे रहा है और किसान झांसी की तर्ज पर चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को यहां झांसी के डिफेंस कॉरिडोर के लिए दिए गए मुआवजे के कुछ पत्रक भी बांटे गए हैं।
पूर्व सांसद ने किसानों के पक्ष में ठोंकी ताल
इस पूरे मामले में पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह भी किसानों के पक्ष में आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को मामले से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में जिकरपुर टप्पल और भट्टा पारसौल में किसानों को सही मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस उनके साथ खड़ी थी। इसके बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने सवा सौ वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन कराया था। खुद राहुल गांधी यहां प्रवास पर रहे थे, बाद में अलीगढ़ में किसान पंचायत हुई थी। अब फिर कांग्रेस किसानों के साथ है। उनके हक की लड़ाई में साथ रहेगी।
किसानों में आक्रोश
20 बीघा मेरी व इतनी ही जमीन ताऊ की है। जिसमें 20 बीघा रोड पर और 20 बीघा अंदर है। रोड की जमीन का रेट अब बहुत ज्यादा है। उस हिसाब से प्रशासन मुआवजा नहीं दे रहा है। स्थिति ये हैं कि कितने लोगों की जमीन इस प्रोजेक्ट में आ रही है, इसकी कोई सूची तक नहीं बनी है। प्रशासन ने किसानों को अधिग्रहण का कोई नोटिस तक नहीं दिया है। एक-एक किसान को बुला कर विभिन्न तरीकों से दबाव बना कर जमीन लेने की कोशिश हो रही है।
-राजेश शास्त्री।
हम चार भाइयों के बीच 55 बीघा जमीन हैै। अच्छे काम के लिए जमीन देने से मना नहीं कर रहे लेकिन सर्किल रेट का छह गुना मुआवजा और एक परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी चाहिए। क्योंकि तीन साल से यहां का सर्किल रेट नहीं बढ़ा है। हमारा पूरा गुजारा खेती से चलता है। बच्चों की फीस, उनका पालन पोषण, पूरा जीवन बिना पैसे के कैसे गुजरेगा। दोगुने मुआवजे पर जमीन नहीं देंगे।
-महावीर सिंह।
छह गुना मुआवजे की मांग की है या झांसी के बराबर चार गुना मुआवजा और एक सरकार नौकरी दें। हमारे परिवार की दस बीघा जमीन है। जमीन देना या न देना स्वैच्छिक होना चाहिए। इसमें जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
-शिवचरन रावत।
अंडला की जमीनों का सर्किल रेट तीन साल से नहीं बढ़ा है। दो साल पहले डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की बात शुरू हुई थी, उसी वक्त से अंडला की जमीन इसके लिए प्रस्तावित थी। इसीलिए यहां का सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया। यहां का सर्किल रेट तीन लाख 30 हजार रुपये बीघा तक है, जिसके अनुसार दोगुना मुआवजा 6.60 लाख बनता है। मौके पर 20 से 25 लाख रेट चल रहा है।
-रामनिवास रावत।
मैं दिव्यांग हूं, पूरा परिवार 20 बीघा जमीन पर बसर करता है। जमीन की बाजार की कीमत के अनुसार सर्किल रेट कुछ नहीं है। ऐसे में दोगुना मुआवजा किसानों के साथ मजाक है। पूर्वजों की जमीन लेकर प्रशासन हमको सड़क पर खड़ा कर देगा। इसलिए चार गुना मुआवजा और एक सरकारी नौकरी के बिना जमीन नहीं देंगे।
-शिव कुमार।
जिला प्रशासन किसानों की हर समस्या का समाधान कर रहा है। शासन के निर्देश पर सर्किल रेट से दोगुने मुआवजे पर जमीन ली जा रही है। किसानों पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया गया है। पूरे इलाके की शांति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।
-अंजनी कुमार सिंह, एसडीएम खैर।