मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भानु प्रताप सिंह कल्याणी ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए इस माह के अंत तक क्षय रोग उन्मूलन अभियान जन आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा। समूचे मार्च महीने को जन आंदोलन के रूप में मनाया जाएगा।
प्रेस से रूबरू होते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा टीबी के इलाज के दौरान मरीजों को 500 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में 8 ट्ूनाट मशीन हैं । सभी चिह्नित टीबी मरीजों की जांच ट्ूनाट मशीन के जरिये दो पारियों में की जा रही है। ताकि यह जल्दी से पता लग सके कि उक्त मरीज कहीं किसी दवा से प्रतिरोध तो नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में उक्त मरीज का सही इलाज शुरू कर दिया जाता है।
एमडीआर मरीजों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि कोई एमडीआर मरीज अगर सार्वजनिक रूप से खांसता है तो वह टीबी ही फैलाएगा। जरूरी है कि कभी भी किसी को खांसी आये तो मास्क या मुंह पर कपड़ा रख कर ही खांसे, जिससे टीबी का संक्रमण फैलने न पाए। कार्यक्रम की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि अभी कोविड-19 चल रहा है।
इसके तहत वर्ष 2021 को पूरे वर्ष सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा जन आंदोलन के नाम से भिन्न अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। उसी के तहत दस्तक अभियान, विश्व क्षय रोग दिवस के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों को चलाया जा रहा है। जिससे टीबी के छिपे हुए ऐसे समस्त मरीजों को खोजकर उन्हें तत्काल सही इलाज पर लाया जा सके।
जिले में 35 सीएचसी व पीएससी पर बलगम जांच की सुविधा है एवं 20 टीबी यूनिट सक्रिय हैं। 3 सीबी नाट साइट्स जिला क्षय रोग केंद्र, पंडित दीनदयाल संयुक्त अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में स्थापित हैं। जिला कार्यक्रम समन्वयक सतेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान में स्वास्थ्य टीम ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीज खोजेगी।