आज दोपहर बाद अलीगढ़ का नया सांसद सबके सामने होगा। द्विपक्षीय मुकाबले में वर्तमान सांसद एवं भाजपा के दोबारा प्रत्याशी बने सतीश गौतम और गठबंधन के उम्मीदवार अजीत बालियान के बीच कांटे की टक्कर है। गठबंधन के खेमे से अलीगढ़ संसदीय सीट बसपा के पक्ष में गई और नये चेहरे के रूप में अजीत बालियान सामने आए। मोदी को ‘हां’ या मोदी को ‘ना’ की इस लड़ाई में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, यह आज पता चला जाएगा। फिलहाल दोनों खेमों में हार जीत को लेकर टेंशन चरम पर है। अब कुछ ही घंटों में उनकी महीनों की मेहनत का परिणाम सामने होगा। गौर हो कि दोनों प्रत्याशियों को इस चुनाव में टिकट हासिल करने में भी खासा दम लगाना पड़ा था ।
सांसद सतीश गौतम बुधवार दोपहर में अपने विद्यानगर स्थित कार्यालय में समर्थकों के साथ रहे और मतगणना की तैयारियों की समीक्षा करते रहे। मुख्य चुनाव अभिकर्ता एवं भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संदीप चाणक्य से मंत्रणा की। भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी, नत्थी सिंह, जयदीप गौड़ सहित अन्य नेता उनके साथ रहे। मतगणना के दौरान चौकसी रखने, गिनती की राउंडवार शीट साथ में रखने को कहा गया।
इधर, बसपा जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव के स्वर्णजयंती नगर स्थित गुरुकृपा अपार्टमेंट के कैंप कार्यालय में बसपाइयों और गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। यहां पर अजीत बालियान के बड़े भाई वीरेंद्र बालियान मुख्य चुनाव अभिकर्ता हैं। उन्होंने सभी मतगणना अभिकर्ताओं को एक एक वोट की गिनती पर पूरा ध्यान देने, ईवीएम की निगरानी रखने और हर सूचना उन तक पहुंचाने की ताकीद की है।
बहरहाल, अलीगढ़ संसदीय सीट की पांच विधानसभा क्षेत्रों में हुए इस रोचक मुकाबले में 1140 मतदान केंद्र ऐसे रहे हैं जहां पर 60 से लेकर 80 फीसदी के ऊपर तक मतदान हुआ है। 27 मतदान केंद्रों पर 80 फीसदी से ऊपर, 290 मतदान केंद्रों 70 प्रतिशत से ज्यादा और 823 मतदान केंद्रों पर 60 फीसदी से भी आगे वोट पड़े। यही 1140 वे खास मतदान केंद्र हैं जिनसे हार जीत का अंतर सामने होगा, क्योंकि 30, 40 और 50 फीसदी वाले मतदान केंद्रों पर मुकाबला बराबरी का माना जा रहा है। अब कुछ ही घंटों में ये तस्वीर साफ हो जाएगी।
सतीश जीते तो...
अलीगढ़। राज पैलेस में हुए जबरदस्त विरोध के बाद भी सतीश का टिकट कन्फर्म होने के बाद से दोनों खेमों में अंदरखाने वर्चस्व की लड़ाई जारी है। पूरे प्रचार में भी इस किस्से सामने रहे। अब अरग सतीश जीते तो राज पैलेस के रसूख पर असर पड़ेगा। अगर दूरियां बढ़ी तो भाजपा के स्पष्ट रूप से दो शक्ति केंद्र बनेंगे। इसी तरह से लगातार दोबारा सांसद बनने पर सतीश के केंद्रीय मंत्रिमंडल में जाने के भी चांस बन रहे हैं क्योंकि वह मंडल में भाजपा के अकेले ब्राह्मण सांसद होंगे।
अजीत जीते तो..
अलीगढ़। पहले जयवीर सिंह के भाजपा में जाने और अब रामवीर उपाध्याय के बसपा से निलंबन के बीच अजीत की जीत हुई तो वह अलीगढ़ मंडल में बसपा के बड़े नेता हो जाएंगे। वह पहले जाट नेता होंगे जो इस स्तर पर आकर बसपा की कमान संभालेंगे। इसके अलावा बसपा जाट, दलित, मुस्लिम, यादव की सोशल इजींनियरिंग के फार्मूले को सफल करने में कामयाब होगी। जिसका फायदा उसको आगे के विधानसभा चुनाव में मिलेगा। यही नहीं बसपा-सपा-रालोद गठबंधन भी मजबूत होगा।