महानगर के गूलर रोड गली नंबर सात के एक मजदूर परिवार पर बारिश और बिजली कहर बनकर बरपी। रविवार तड़के घर में भरे बारिश के पानी में विद्युत करंट उतरने से गृहस्वामिनी मीरा (52), बेटा नितिन (25) व अविवाहित बेटी कीर्ती (22)की मौत हो गई।
इस दौरान तीनों को बचाने आए गृहस्वामी बाल-बाल बच गए। उन्हें पुत्रवधु ने हाथ पकड़कर खींच लिया, वरना वह भी करंट की चपेट में आ जाते। इस दुर्घटना के बाद गुस्साई भीड़ व भाजपाइयों ने जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही व विद्युत विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर हंगामा काटा। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर व स्टाफ से हाथापाई तक कर दी और जमकर नोकझोंक हुई। यहां पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा व सरकारी नौकरी तक की मांग उठी। कई घंटे तक चले हंगामे पर डीएम-एसएसपी ने पहुंचकर भीड़ को शांत किया और मुआवजे पर शासन में वार्ता का आश्वासन दिया। तब हंगामा शांत हुआ। वहीं पीड़ित पक्ष ने इस एक्सीडेंट को लेकर विद्युत, नगर निगम, स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ तहरीर भी दी है।
गूलर रोड गली नंबर 7 निवासी राकेश वार्ष्णेय की गूलर रोड पर पेट्रोल पंप के सामने साइकिल मरम्मत की दुकान है। शनिवार आधी रात से हुई बारिश के कारण उनके घर की गली में और घर के अंदर पानी भर गया। रविवार सुबह छह बजे जब उन पत्नी मीरा जागी और पानी घर में घुसा देखा तो बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। इस दौरान पानी में खड़े होकर उन्होंने सबमर्सिबल भी शुरू कर दी। लोगों के अनुसार इसी बीच अचानक घर के दरवाजे पर लगे विद्युत पोल में करंट उतरकर पानी में आया और मीरा ने सबमर्सिबल का बटन दबाया तो अर्थ-फेस मिलने से महिला करंट से चिपक गई। उसकी चीख सुन बेटी कीर्ति आगे बढ़ी तो वह भी करंट से चुपक गई।
इसी तरह बेटा नितिन चिपक गया। घर में चीख-पुकार मचने पर ऊपर से राकेश व नितिन की पत्नी उतरे तो पुत्रवधू ने राकेश को पानी में जाने व तीनों को बचाने से हाथ पकड़कर खींच लिया। वरना वह भी करंट से चिपक जाते। इसी बीच शोर पर पड़ोसियों ने विद्युत स्टेशन सूचना दी। मगर एक घंटे तक विद्युत आपूर्ति शटडाउन नहीं हुआ। इसी दौरान पड़ोसियों की मदद से तीनों को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज शुरू ही नहीं किया और इमरजेंसी में तीनों ने तड़फकर दम तोड़ दिया। इसके बाद लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वहां डॉक्टरों संग मारपीट, हाथापाई तक कर दी। पब्लिक की जमकर नोकझोंक हुई।
खबर पर आई बन्नादेवी पुलिस ने जैसे-तैसे डॉक्टरों को बचाया। बाद में मुआवजे की मांग ने तूल पकड़ा तो डीएम राजमणि यादव व एसएसपी लव कुमार ने पहुंचकर दस लाख रुपये की बात कही। मगर यहां लोगों ने परिवार को पचास लाख व सरकारी नौकरी की मांग रख दी। इस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वह शासन को इस मांग के संबंध संस्तुति कर भेजेंगे। तब जाकर दुपहर करीब एक बजे हंगामा शांत हुआ। देर शाम कांग्रेस के पूर्व विधायक विवेक बंसल ने मौके पर पहुंच कर मृतक के परिजनों को सांत्वना दी।
डीएम-एसएसपी ने दिलाया आश्वासन
भाजपा नेताओं के हंगामे, मुआवजे की मांग व एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर पर जिलाधिकारी राजमणि यादव व एसएसपी लव कुमार जिला अस्पताल पहुंचे। इससे पहले एडीएम सिटी व एसपी सिटी पहुंच चुके थे। डीएम-एसएसपी के साथ हुई भाजपाइयों की बैठक में मांग रखी गई कि मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए। जिस पर डीएम ने कहा कि 30 हजार के मुआवजे की मदद तो तत्काल देने की बात कही। बाकी मांगों पर शासन से वार्ता व सस्तुति की बात कही।
कालीचरन-इन्द्रकुमार-शकुंतला ने दी मदद
जिला अस्पताल में भी तय हुआ कि इन्द्रकुमार तेल वाले वार्ष्णेय महासभा की ओर से एक लाख रुपये व व्यक्तिगत अपनी तरफ से 50 हजार रुपये की मदद परिवार को देंगे। वहीं समाजसेवी कालीचरन वार्ष्णेय ने भी 50 हजार रुपये व महापौर शकुंतला भारती ने भी एक लाख रुपये देने का ऐलान किया।
फूट-फूट कर खूब रोईं मेयर
गूलर रोड पर हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद महापौर शकुन्तला भारती जिला अस्पताल पहुंची, जहां उनके आंसू थम नहीं पाए। तीनों शवों को देखकर वह फूट-फूट कर खूब रोई। यह भी कहा कि जलभराव मेरे हाथ की बात नहीं है, जो लोग मुझ पर गुस्सा दिखा रहे है, मैं इस परिवार के साथ पहले भी थी और आज भी हूं। जिला अस्पताल के बाद तीनों शव मोरचरी पहुंचे तो वहां भी मेयर के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इतना ही नहीं जितनी आंखे वहां लोगों की नजर आ रही थी, सभी आंसूओं से गमगीन थीं।
टूट पड़ी राकेश पर दैवी आफत
सबसे बुरा हाल तो परिवार के मुखिया राकेश का था, जिसके सामने उसका इकलौता बेटा, पत्नी व बेटी ने तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ दिया। पूरा परिवार आंखों के सामने तबाह हो गया और वह कुछ नहीं कर पाया। 58 साल के राकेश के सामने उसकी विधवा बहू पूनम व दो नाती ढाई व एक साल के चेहरे बस यही बयां कर रहे थे कि आखिर अब और क्या देखने बाकी है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद तीनों की चिंताएं बाप राकेश के सामने जलीं। पूरी तरह से टूट चुके राकेश की जुबां पर बस एक ही शब्द था कि उसे इतनी बड़ी सजा ऊपर वाले ने क्यों दी।
पूरी गली में फैल चुका था करंट
राकेश के परिवार की चीख-पुकार सुन पड़ोस का कोई व्यक्ति तत्काल उनकी मदद के लिए इसलिए आगे नहीं बढ पा रहा था, क्योंकि गली में लग रहे खंबे से उतरा करंट पूरी गली में फैल चुका था, कोई भी व्यक्ति चाह कर भी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था, सभी अपने को असहाय ही महसूस कर रहे थे।
डाक्टर के अपशब्द पर हुई नोकझोंक
एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर पर भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता जिला अस्पताल पहुंचे, जब उन्हें पता चला कि डॉक्टरों की लापरवाही है, तो जमकर आक्रोश दिखाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान डॉक्टर ने कुछ अपशब्द कह दिए, जिसे लेकर भाजपा नेता मानव महाजन व विनय वार्ष्णेय की डॉक्टरों से जमकर नोक-झोंक हुई। जहां पहुंची कई थानों की पुलिस ने मामला समझा बुझाकर शांत कराया। भाजपाइयों की मांग थी कि तीनों मौत देवीय आपदा से हुई हैं। जिसके चलते उन्हे 50 लाख रुपये का मुआवजा व नितिन की विधवा को सरकारी नौकरी दिलाई जाए। इस मांग को लेकर हंगामा रूक-रूक कर कई बार होता रहा। इस मौके पर सुबोध स्वीटी, पूनम बजाज, युवा मोर्चा महानगर अध्यक्ष मनोज शर्मा, कालीचरण वार्ष्णेय, अतुल राजाजी आदि भी थे। देर शाम डॉक्टरों ने भाजपाइयों के खिलाफ तहरीर दे दी।