अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का संकट बरकरार है। मंगलवार को भी कार्डियोलॉजी विभाग के सीसीयू और आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप रही। इससे यहां पर ऑक्सीजन के सहारे चल रहे 205 मरीजों की सांसों पर संकट लगातार बढ़ रहा है।
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मौजूद लिक्विड गैस प्लांट के माध्यम से किसी तरह मरीजों की जान बचा रहे हैं। अगले एक-दो दिन में अगर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं मिली तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं।
प्रिंसिपल प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि इस समय मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में 60 मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर हैं, जबकि ट्रामा सेंटर में 145 मरीज ऑक्सीजन के सहारे हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों से स्थिति को लेकर विचार विमर्श किया है, अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिली।
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि मंगलवार की देर शाम तक सिलिंडर वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं मिली है।
हमारा स्टाफ इस समय बेहद जटिल परिस्थितियों में काम कर रहा है। हम ऑक्सीजन का इंतजार कर रहे हैं। गौर हो कि सोमवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्ति लड़खड़ा गई थी, तब से लेकर अब तक संकट बरकरार है।
35 साल के करियर में ऐसे हालात कभी नहीं देखे : प्रिंसिपल
प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि उन्होंने अपने 35 साल के करियर में मेडिकल कॉलेज में ही नहीं, देश के अंदर यह पहली बार ऐसी स्थिति देखी है, जब लोग सांसों के लिए छटपटा रहे हैं। अभी तक उन्होंने सिर्फ काल्पनिक किस्सों और किताबों में ही महामारी और उससे पैदा हुई जटिल स्थिति का जिक्र सुना और पढ़ा था।
लेकिन पहली बार इसको देख रहे हैं। इससे उनका हृदय बहुत दुखी है। वह चाह कर भी मरीजों को बेहतर उपचार नहीं दे पा रहे हैं। वह कहते हैं कि डॉक्टर इलाज कर सकता है लेकिन ऑक्सीजन कहां से पैदा कर दे।
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे मरीज
ऑक्सीजन और बेड के अभाव में मंगलवार को मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट के चलते मरीज वापस जाते हुए देखे गए। जबकि मंगलवार को सीटी स्कैन की रिपोर्ट को अमान्य करार दिए जाने के बाद मरीजों के सामने और भी जटिल स्थिति पैदा हो गई।