पूर्व मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता ठा. जयवीर सिंह के करीबी शशि चौहान की हत्या में जो बातें छनकर आई हैं, वह चौंकाने वाली हैं।
हत्याकांड में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों से पूछताछ और अब तक की जांच पर गौर करें तो शशि व अर्शी दोस्त थे। अर्शी के निशाने पर शशि चौहान था ही नहीं। वह तो अपने सगे भाई शकील द्वारा बसपा प्रत्याशी को सपोर्ट व वोट देने पर नाराज था। इसी बात पर उसने पोलिंग बूथ पर ही भाई को गोली मारने तक की धमकी दे दी थी और शाम को भाई पर हमला भी बोला था। मगर साथ बैठे दबंग छवि के शशि ने उसे रोकना चाहा तो अर्शी ने दूसरी गोली शशि को मार दी। पुलिस पकड़े गए दोनों आरोपियों शकील व साजिद पर धारा 120 बी भी लगाएगी, क्योंकि जिस तरह से इन्होंने पुलिस को सूचना नहीं दी, उससे ये मामला साजिश के दायरे में माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार रविवार देर रात हुई घटना के बाद अर्शी तो मौके से भाग गया था। मगर मौके पर मौजूद शकील निवासी धोबी वाली गली नई बस्ती और साजिद पुत्र चमन खां निवासी लोहिया नगर बन्नादेवी घायल शशि को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां मौत होने के बाद भी उन्होंने पुलिस को खबर नहीं दी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ही पुलिस को सूचना दी। तब परिवार व सत्तन सिंह आदि को सूचना मिली। इस दौरान दोनों डॉक्टरों के सवालों का जवाब देने से भी बचते रहे। मगर जब पुलिस वहां पहुंची और यह सवाल उठाया कि इन्हें कौन यहां लाया और इतनी देर में सूचना क्यों दी, तब यह दोनों सामने आए। जब पुलिस के सवालों में दोनों उलझे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
बाद में परिजनों की तहरीर पर यह दोनों मुकदमे में नामजद हुए और रात में जब इनसे परिजनों आदि के सामने ही पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि शशि व अर्शी दोनों अच्छे दोस्त थे। शहर विधानसभा से जुड़े बसपा के बड़े नेता की मदद से अर्शी पार्षद का टिकट मांग रहा था। मगर यह टिकट दूसरे को मिल गया। इस पर अर्शी ने उसके विरोध में कांग्रेस प्रत्याशी का सपोर्ट शुरू कर दिया। मगर परिवार बसपा प्रत्याशी को ही सपोर्ट कर रहा था। उसके विरोध पर परिजनों ने समझाया था और खुद शशि ने भी यह कहकर समझाया था कि जब परिवार बसपा को सपोर्ट कर रहा है तो तू भी साथ हो जा। अर्शी को लगा कि शशि भी उसका विरोध कर रहा है, इसलिए वह भी खफा हो गया था।
बाद में बसपा की एक सभा के दौरान अर्शी ने गोली भी चलाई थी। बात पुलिस तक पहुंची और जहां के तहां निपटा दी गई। मतदान के समय बूथ पर अर्शी को पता लगा कि शकील व उसकी पत्नी ने बसपा प्रत्याशी को ही वोट दिया है। इस पर अर्शी व शकील में कहासुनी हुई और अर्शी ने भाई को घर पहुंचकर गोली मारने की धमकी दी। इस डर से शकील दिन भर घर नहीं गया, बल्कि शाम को शशि व साजिद आदि के साथ मोहल्ले में पहुंचा। सभी वहां बैठे थे, तभी अर्शी आ गया और शकील से बदतमीजी शुरू कर दी। इसी बीच एक गोली चलाई, जिससे शकील बच गया। मगर शशि ने उसे रोकना चाहा तो दूसरी गोली शशि को मार दी। रविवार देर रात शशि चौहान निवासी पृथ्वी राज नगर को नई बस्ती में गोली मारी गई थी। बाद में मेडिकल में उसकी मौत हो गई। इस हत्या में अर्शी व उसके भाई शकील के अलावा साजिद को नामजद किया गया। है। शकील और साजिद को सोमवार को जेल भेज दिया गया।
अर्शी के हाथ में किसने दिया लाइसेंसी हथियार
जेएन मेडिकल कॉलेज में रात को शकील व साजिद द्वारा दी गई जानकारी व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शशि के सीने में .32 बोर का कारतूस मिलने के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आखिरकार अर्शी के पास लाइसेंसी हथियार कहां से आया। वह किसका हथियार था। इस सवाल का जवाब भी पुलिस को अर्शी की गिरफ्तारी के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल पुलिस की टीमें अर्शी की तलाश में जुटी हैं।
गोली दिल चीरती हुई निकली
सोमवार दोपहर शशि चौहान के शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम में पता चला है कि उसको बेहद करीब से मारी गई गोली पीठ के रास्ते से घुसी और दिल को चीरती हुई निकल गई। हां, सीने में कारतूस का पीछे का हिस्सा फंसा रह गया, जिसे शव के एक्सरे के बाद निकाला जा सका।
सियासतदां की सरपरस्ती की चर्चाएं, पूछताछ को बुलाया
अर्शी पर सियासतदां की सरपरस्ती की चर्चाएं जोरों पर हैं। पुलिस का मुखबिर तंत्र बता रहा है कि अर्शी वारदात के बाद सियासतदां के पास पहुंचा था। इसके बाद वहां से भुजपुरा तक गया। फिर उसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा है। फिलहाल पुलिस सर्विलांस आदि माध्यमों से उसकी खोज में लगी है और सियासतदां भी रडार पर है। उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ के बाद उसे वापस भेज दिया गया।
पोस्टमार्टम केंद्र पर भीड़ उमड़ी
शशि चौहान की मौत की खबर पर सुबह से ही पोस्टमार्टम केंद्र पर नेताओं व परिचितों की भीड़ जुटने लगी थी। दोपहर तक यहां पूर्व मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता ठा. जयवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, भाजपा जिलाध्यक्ष देवराज सिंह, भाजपा नेता नरेंद्र पचौरी, ठा. सत्तन सिंह आदि पहुंच गए। बाद में बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह भी पहुंचे। यहां दोपहर करीब डेढ़ बजे तक चली पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान एक ही सवाल उछलता रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अर्शी ने गोली मार दी। कुल मिलाकर दोस्तों के बीच के झगड़े की असल वजह जानने के लिए सभी परेशान थे। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाया गया, जहां परिवार में कोहराम मच गया। शाम को आईटीआई स्थित श्मशान गृह पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान शशि का डेढ़ साल का बेटा व अन्य परिजन मौजूद रहे।
- शशि चौहान की हत्या दोस्तों संग बैठने के दौरान हुए विवाद में हुई है। यह बात खुद अर्शी के नामजद भाई शकील व साजिद ने पूछताछ में स्वीकारी है। अर्शी ने बसपा प्रत्याशी का विरोध किया था, जबकि शकील सपोर्ट में था। इसी विवाद में शामिल हुए शशि की हत्या कर दी गई। बाकी तथ्यों पर अर्शी की गिरफ्तारी के बाद तस्वीर साफ होगी। परिवार की तहरीर को भी इसी जांच में शामिल किया जाएगा। अर्शी की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हुई हैं।
- राजेश पांडेय, एसएसपी
- अपराधी किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। इस तरह की बात हमने पुलिस के सामने रखी है। शशि चौहान के हत्यारों को जल्द ही पुलिस पकड़े। उनको इस अपराध की सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए। यही बातें हमने पुलिस प्रशासन से की है।
- देवराज सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा