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छह बुजुर्गों में से एक की रिहाई पर मुहर

Thu, 11 Feb 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
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कारागार में बुधवार को डीएम-एसएसपी की मौजूदगी में समय पूर्व रिहाई संबंधी प्रशासनिक समिति की बैठक में छह बुजुर्ग कैदी पेश हुए, जिसमें से मात्र एक की रिहाई की संस्तुति पर मुहर लगी। बरला निवासी यह बुजुर्ग 19 साल से जेल में निरुद्ध है और बीमार भी है। हालांकि अभी यह अंतिम निर्णय नहीं है। संस्तुति रिपोर्ट शासन और राज्यपाल की टेबिल तक जाएगी। तभी रिहाई पर निर्णय लिया जाएगा। मगर पहली सीढ़ी इस बुजुर्ग कैदी ने पार कर ली है।
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जेल नियम के अनुसार समय पूर्व रिहाई समिति में जिलाधिकारी, एसएसपी, जेल के वरिष्ठ अधीक्षक, जिला प्रोवेशन अधिकारी शामिल होते हैं। यह समिति समय-समय पर ऐसे सजायाफ्ता कैदियों से आवेदन मांगती है, जो लंबे समय से जेल में हैं। बुजुर्ग हैं और बीमार हैं। उनका जेल में चाल-चलन बेहतर है। इन आवेदनों पर विचार कर शासन को रिहाई संबंधी संस्तुति भेजी जाती है। बुधवार को इसी समिति की बैठक हुई।

 समिति के समक्ष महानगर के कोतवाली इलाके के सजायाफ्ता कैदी हस्सू पहलवान, खैर के बनवारी सिंह पुत्र सुम्मेर सिंह, बरला के डिप्टी पुत्र गोविंद व उसके भाई रामवीर सिंह, बन्नादेवी के अतुल पुत्र शिशुपाल व अजीत पुत्र जयंती राजेंद्र नगर बन्नादेवी पेश हुए। इनमें से हस्सू पहलवान यहीं जिला कारागार में निरुद्ध हैं, जबकि बाकी के पांच यहां से आगरा सेंट्रल जेल शिफ्ट किए जा चुके हैं। इन पांचों को समिति के समक्ष पेशी के लिए यहां लाया गया था।
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 सभी ने अपने आवेदन पेश किए। जिनमें से मात्र डिप्टी सिंह को संस्तुति के लिए पात्र पाया गया। यह बुजुर्ग कैदी अब तक जेल में 19 साल 2 माह 26 दिन काट चुका है और 69 साल उम्र होने के कारण बीमार भी है। कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज के अनुसार बाकी की जेल में बिताई गई अवधि कम होने के कारण संस्तुति नहीं हो पाई।

पांच साल में 2 दर्जन संस्तुति
यहां खास बात है कि जिला स्तर पर होने वाली समिति की बैठक के स्तर से पिछले पांच साल में मेडिकल बोर्ड व प्रशासनिक बोर्ड ने दो दर्जन से अधिक संस्तुति कर शासन को भेज दी हैं। मगर 2010 के बाद अभी तक किसी बंदी की रिहाई का आदेश शासन से यहां नहीं आया है।
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