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नीरज बवाना के खात्मे को यूपी से धन जुटा रहा मोंटी

Thu, 09 Aug 2018 02:02 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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नीरज बवाना के खात्मे को यूपी से धन जुटा रहा मोंटी - फोटो : Amar Ujala
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टप्पल पुलिस द्वारा दबोचा गया गौरव पूठ उर्फ मोंटी गैंग के मंसूबों को सुनकर खुद दिल्ली पुलिस हिल गई है। नीटू डावोहा के मारे जाने के बाद यह गैंग मोंटी की अगुवाई में दिल्ली के कुख्यात अपराधी नीरज बवाना के खात्मे के इरादे से भाड़े पर हत्याएं व अन्य अपराध करता फिर रहा है। इन अपराधों से अर्जित होने वाली आय से गैंग नीरज बवाना के खात्मे का मंसूबा पाले हुए हैं।
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इसी कड़ी में झांसी में प्रापर्टी डीलर/पेट्रोल पंप स्वामी संजय वर्मा की हत्या की सुपारी ली गई। मगर उसमें संजय के दो ही गोली लगीं, जबकि उसका गनर मारा गया। उस गाड़ी पर इस कदर गोलियां बरसाई गईं कि मारे गए गनर के शरीर से 13 गोलियां निकली थीं। जहां सीसीटीवी में इनके चेहरे कैद हुए थे और वहां से इन पर इनाम घोषित हुआ था। अब यह मोंटी के इशारे पर यहां एक हत्या व एक सर्राफ को लूटने आए थे। मोंटी को आना था, इसके बाद यह वारदात होनी थीं।

यह इस गैंग का ट्रैक रिकार्ड, हरियाणा से मिला इनपुट
दिल्ली, हरियाणा और यूपी में आतंक का पर्याय रहा नीटू डावोहा 3 साल पहले पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। इसके बाद उसका गैंग पारस व दरमट ने संचालित किया। इन दोनों की भी नीरज बवाना गैंग से रंजिश के चलते पुलिस अभिरक्षा में हत्या कर दी गई थी। वर्तमान में इस गैंग को मोंटी संचालित कर रहा है। 
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नीरज बवाना से पारस दरमट की हत्या का बदला लेने की साजिश रच रहा है, जिसके लिए बड़ी रकम की जरूरत है। इसी क्रम झांसी में प्रापर्टी डीलर सरदार सिंह गुर्जर ने अपने भतीजे की हत्या के बदले इस गैंग को संजय वर्मा के खात्मे के लिए 20 लाख की सुपारी दी थी और 21 जुलाई को झांसी में वारदात हुई। इस हत्या के बाद से झांसी व हरियाणा पुलिस इनके पीछे पड़ी थी। दोनों पर वहां से 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। हरियाणा पुलिस के इनपुट पर ही अलीगढ़ पुलिस ने गैंग को बैना गांव से दबोचा था।

जयपाल-महेंद्र के घर किसकी हत्या के इरादे से आया गैंग
अब पुलिस इस सवाल पर काम कर रही है कि आखिर यह गैंग जयपाल के घर किसकी हत्या के इरादे से आकर ठहरा था। इसके चलते जयपाल व उसके परिजनों पर पुलिस पूछताछ में लगातार दबाव बन रहा है। अगर जयपाल के पिछले ट्रैक रिकार्ड पर गौर करें तो जयपाल व उसके भाई महेंद्र और वीरेंद्र मथुरा के कुख्यात अपराधी मान सिंह के साथ अपराध किया करते थे।

न्होंने अपने गांव के अलावा आसपास के कई जिलों में अपने दौर ताबड़तोड़ हत्याएं व अन्य अपराध किए। महेंद्र के जेवर में पब्लिक मुठभेड़ मारे जाने के बाद यह गैंग ठंडा हो गया। जयपाल की गांव के ही कुछ लोगों से रंजिश भी चल रही है, जो लंबे समय से समझौते के चलते शांत पड़ी है। मगर पुलिस इस सवाल का जवाब तलाशने में जुटी है कि आखिर अब किसकी हत्या होनी थी। अब तक की जांच में पता चला है कि यह अपराधी जयपाल के घर सोमवार तड़के ही पहुंचे थे। जहां खाना खाया और उसके भाई वीरेंद्र के घर चाय पी।

अतरौली की मुठभेड़ में फरारों का इनसे क्या नाता
इस मुठभेड़ से पहले पुलिस ने बैना से दबिश के दौरान टिंकू उर्फ  पूरन पुत्र राजबहादुर नगला माली धनीपुर मंडी गांधीपार्क व अशोक पुत्र श्योदान जानकी नगर थाना गांधीपार्क को भी शूटरों के साथ गिरफ्तार दिखाया है। इनके विषय में खास बात है कि यह दोनों पिछले सप्ताह अतरौली में हुई दलवीर अहेरिया संग मुठभेड़ में पुलिस को चकमा देकर भाग गए थे। उस समय पुलिस ने इन दोनों को दलवीर गैंग का साथी बताया था। अब यह दोनों अपराधी टप्पल कैसे पहुंच गए और इनका दिल्ली के शूटरों से क्या नाता है। इसी नाते इन अपराधियों पर पुलिस ने क्वार्सी का डाका, देहली गेट की लूट, अतरौली में पुलिस मुठभेड़, गांधीपार्क में अपराध के अलावा टप्पल से पुलिस हिरासत से भागने के अलावा टप्पल में मुठभेड़ आदि के मुकदमे दर्ज बताए हैं। वहीं इस सवाल का जवाब पुलिस नहीं दे पा रही कि इन बदमाशों को दो दिन तक थाने में क्यों बैठाए रखा। जिसके चलते इन्हें थाने से भागने का मौका मिला और मुठभेड़ में पुलिस ने फिर जख्मी किया। वहीं भागने के बाद इन्हें अपने साथी इतनी आसानी से कैसे टप्पल में ही मिल गए और मुठभेड़ में फिर वह भाग गए।
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