एटा के मुफ्ती की हत्या के गवाह उनके बेटे शोएब ने पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह से उनके हाथीडूबा स्थित कार्यालय पर मुलाकात की। शोएब ने अपने पिता की हत्या में शामिल लोगों के बारे में, पुलिस रिपोर्ट, अब तक की जांच और मुकदमे में हो रही सुनवाई से पूर्व विधायक को अवगत कराया। दोनों के बीच तकरीबन डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद पूर्व विधायक मीडिया से रूबरू हुए तो उनके सुर बदल चुके थे। उन्होंने खुद को दोनों पक्षों का शुभचिंतक बताया। कहा कि उनके पास पहले नौशाद और मुस्तकीम की परिवार की पीड़ित महिलाएं मां के स्वरूप में आई थीं इसलिए उन्होंने उनकी बात सुनी और मीडिया के माध्यम से उनका पक्ष सार्वजनिक कराया। उनकी मदद की।
सोमवार को जब एटा के मुफ्ती के बेटे शोएब व बाकी लोगों से उनका पक्ष सुना। शोएब का अपना दर्द है। वह शोएब के साथ भी पूरी हमदर्दी रखते हैं। इसलिए अब उन्होंने फैसला किया है कि वह आपराधिक वारदातों में शामिल साबिर जैसे किसी भी व्यक्ति के साथ नहीं हैं। आपराधिक वारदातों के जरिए सूबे की फि जा बिगाड़ने वालों का कोई साथ नहीं देगा। आपसी भाइचारे को तोड़ने वाले समाज के लिए एक श्राप हैं। यही प्रयास साबिर अली ने किया था। अब उनका प्रयास होगा कि धर्मगुरु की हत्या के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
पूर्व विधायक से जब नौशाद और मुस्तकीम के मामले में पैरवी करने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एनकाउंटर सही था या गलत..? यह निष्पक्ष जांच का विषय है। वह कोई जांच अधिकारी नहीं। बस इतना जरूर है कि वह किसी भी गलत लोगों के समर्थन में नहीं हैं। इस दौरान एटा के जहीर अहमद, शराफत काले, कैसर अली, जान आलम, बसपा पार्षद मुसाहत अली, बिल्लू चौहान, एएमयू के छात्रनेता माजिद खां और बसपा के तकरीबन सभी पार्षद मौजूद थे।
कासगंज में डकैती के बाद एक्सीडेंट ने पकड़वाया था अफसर
साधुओं की सिलसिलेवार हत्या करता घूम रहा पश्चिम बंगाल का गैंग मारा गया मुस्तकीम और फरार अफसर ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस जांच में इस बात के साक्ष्य मिल रहे हैं। पश्चिमी यूपी के जिलों में नाम उजागर होने के बाद यह लोग कासगंज में सक्रिय हुए थे। वहां भी 2016-17 में कासगंज के मधु मक्खी कारोबारी के घर हत्यायुक्त डकैती के बाद अचानक से अफसर पकड़ा गया था। वरना उस समय भी गैंग ट्रैस न हो पाता। पुलिस जांच के अनुसार डकैती के बाद भागते अफसर एक बाइक सवार से एक्सीडेंट हुआ। दोनों जख्मी हुए और पुलिस दोनों को अस्पताल ले गई। जहां अफसर की अस्पताल में तलाशी हुई जिसमें ज्वैलरी मिली, जो मधुमक्खी कारोबारी के घर से डकैती में लूटी गई है। तब अफसर की मदद से पाशा व असगर आदि को पकड़ा गया। बाद में अफसर जमानत पर आ गया और फिर गैंग ऑपरेट करने लगा। अब साधुओं की हत्या में अफसर 25 हजार का ईनामी है। अफसर ही नौशाद और मुस्तकीम के साथ अलीगढ़ में भी कई हत्याओं में शामिल रहा है और अब तक फरार है। अफसर के साथियों ने उसका मूल पता उझयानी बदायूं बताया था। मगर पुलिस जांच में अफसर मुस्तकीम का चाचा या सगा भाई बताया जा रहा है। जिसकी पुलिस की जांच कर रही है। उसकी नए सिरे से तलाश शुरू कर दी है।
बिजनौर में भी मिले नौशाद और मुस्तकीम परिवार के रहने के साक्ष्य
नौशाद और मुस्तकीम के परिवारों के पतों के सत्यापन में जुटी टीम उत्तराखंड के बाद अब बिजनौर पहुंची है, जहां उसके रहने के साक्ष्य मिले हैं। इनका परिवार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई जगहों पर रहा है। पुलिस इसका पूरा ब्यौरा जुटा रही है। नौशाद मुस्तकीम गढ़मुक्तेश्वर, हरिद्वार के बाद बिजनौर में अलग अलग नाम से रहे हैं। जिसके साक्ष्य मिल रहे हैं। इन शहरों में दोनों ने अलग अलग नामों से काम किया और कई अपराधों को अंजाम दिया। पुलिस अब उन सभी घटनाओं को पिरो रही है। वहीं केंद्रीय एजेंसियां इनके परिवारों के बंगलादेशी कनेक्शन पर तेजी से काम कर रही है।